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पकड़ा गया बच्चों का सौदागर

Sun, 03 Mar 2013 05:31 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। राजकीय रेलवे पुलिस ने शनिवार की सुबह लखनऊ जंक्शन से बच्चों के एक सौदागर को दबोच लिया। उसके पास से तीन मासूमों को भी बरामद किया गया है। इन्हें 19 फरवरी को बिहार से लखनऊ लाया गया था और ठाकुरगंज के एक मकान में कैद करके रखा गया था। रविवार की ट्रेन से दिल्ली ले जाने की तैयारी थी। बच्चों को स्पेशल ज्यूविनाइल पुलिस यूनिट के सिपुर्द कर किया गया है। वहीं, पकड़े गए बच्चों के तस्कर को जेल भेज दिया गया है। जीआरपी ने बताया कि लखनऊ जंक्शन के सर्कुलेटिंक एरिया में शनिवार को अचानक पहुंचे एक व्यक्ति ने वहां खड़े तीन बच्चों की पिटाई शुरू कर दी। मासूमों ने बिलखते हुए मदद की गुहार की। इस पर वहां मौजूद यात्रियों ने हस्तक्षेप किया तो युवक उनसे भी भिड़ गया। इसके बाद लोगों ने जीआरपी को सूचना दी। मौके पर पहुंचे चौकी इंचार्ज मोहम्मद इरशाद त्यागी को मामला संदिग्ध लगा। उन्होंने बच्चों से पूछताछ की तो सनसनीखेज खुलासा हुआ। इसके बाद जीआरपी ने बच्चों के तस्कर बिहार के गया निवासी मोहम्मद फिरोज को गिरफ्तार कर लिया। उसने बताया कि बच्चे नवादा जिले के रहने वाले हैं। इनमें मोहम्मद रिजू (13) व इमरान (9) सगे भाई हैं, जबकि फैय्याज (10) उनका पड़ोसी है। इन्हें उसका भाई मुजम्मिल राजगीर घुमाने के बहाने घर से लेकर निकला था और पटना में उसके हवाले कर दिया। फिरोज बच्चों को लेकर श्रमजीवी एक्सप्रेस में लखनऊ के लिए सवार हो गया। सभी बच्चे गत 19 फरवरी को यहां पहुंच गए और ठाकुरगंज के शेखपुर हबीबपुर के मकान संख्या 543 में कैद कर लिया गया। यहां इन्हें चूड़ियों में नग लगाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। तीनों बच्चों से सोलह से अठारह घंटे तक काम काम कराया जाता था। जब बच्चे घर जाने की जिद्द करते तो फिरोज उनकी पिटाई कर देता। शनिवार की सुबह बच्चों ने घर की सफाई का बहाना बनाया और मौका मिलते ही स्टेेशन की ओर भाग लिए। थोड़ी देर बाद फिरोज को भनक लगी तो वह भी बच्चों का पीछा करते हुए स्टेशन जा पहुंचा गया था। उसने बताया कि बच्चों को लखनऊ में प्रशिक्षित करके तीस से पचास हजार रुपए में दिल्ली ले जाकर बेच देता था। जीआरपी ने मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। चौकी इंचार्ज ने बताया कि मोहम्मद फिरोज से पूछताछ के लिए कोर्ट में अर्जी दी जाएगी, जिससे जानकारी हो सके कि वह और उसका भाई इससे पहले कितने बच्चों की तस्करी में शामिल रहे हैं। बच्चों के तस्कर को पकड़ने वालों में उपनिरीक्षक रोहतास सिंह, आरपीएफ उपनिरीक्षक जयंत सिंह, सिपाही सुखलाल, आलोक व संतोष सिंह शामिल रहे।
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बच्चों का पड़ोसी है मुजम्मिल ः लखनऊ। इमरान कक्षा एक विद्यार्थी है, जबकि उसका बड़ा भाई मोहम्मद रिजू कक्षा दो में पढ़ता है। बच्चों ने बताया कि मुजम्मिल उनके पड़ोस में रहता है और घर वालों से यह कहकर साथ ले आया था कि घूमने के बाद दो-चार दिन में वापस लौट आएंगे।

ट्रेनी कहकर बुुलाते थे ः लखनऊ। बच्चों ने बताया कि यहां उन्हें ट्रेनी कहकर बुलाया जाता था। चार दिन पहले किसी के फोन पर फिरोज ने कहा था कि तीन ट्रेनी तैयार कर रहा हूं। जल्द ही दिल्ली लेकर आता हूं, लेकिन हिसाब ठीक होना चाहिए। यह बात बच्चों ने चूड़ियों में नग लगाते हुए सुन ली। इसके बाद भागने की योजना बनाई। तस्कर ने बताया कि बच्चों को उनकी योग्यता के आधार पर पुरानी दिल्ली ले जाकर बेचने की योजना थी। एक बच्चे के एवज में तीस से पचास हजार रुपए मिलते।
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बिहार से बच्चों की लखनऊ में सप्लाई ः लखनऊ। जीआरपी के मुताबिक फिरोज को उसका भाई मुजम्मिल बिहार से बच्चे सप्लाई करता है। लखनऊ आने के बाद इन्हें ठाकुरगंज के एक मकान में रखा जाता है। यहां करीब एक महीने के प्रशिक्षण के बाद दिल्ली भेज दिया जाता है। इन बच्चों से छह से सात साल तक जमकर काम लिया जाता है। जब यही बच्चे 18 से 20 साल के हो जाते हैं तो ढाई से तीन हजार रुपए की पगार पर रख लिया जाता है।

नहीं रुक रहा बच्चों की तस्करी का धंधा ः लखनऊ। बिहार से बच्चों की तस्करी का धंधा नहीं रुक रहा है। इससे पहले भी जीआरपी व स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से कई बार लखनऊ स्टेशन पर बच्चों की तस्करी करने वाले पकड़े जा चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक लंबी दूरी की ट्रेनों में बच्चों की तस्करी का खेल चल रहा है, लेकिन इस धंधे पर पूरी तरह से नकेल लगाने में ट्रेनों में चलने वाला एस्कॉर्ट भी विफल रहा है।
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