लखनऊ। 13वें वित्त आयोग से मिली अनुदान राशि का हिसाब नहीं देने वाली पंचायतों पर रिकवरी की कार्रवाई होगी। इसके लिए सभी जिला पंचायतों के ग्राम सचिवों को निर्देश दिए हैं कि तीन दिन में अनुदान राशि के खर्च का ब्यौरा जिला पंचायत राज अधिकारी के पास जमा कराएं। तय समयावधि में ब्यौरा नहीं देने वाली पंचायतों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं डिफाल्टर पंचायतों की अनुदान की अगली किस्त भी रोक दी जाएगी।
पंचायती राज अधिनियम की धारा 50 के तहत हिसाब में लेटलतीफी बरतने वाली पंचायतों के खिलाफ अब कड़ा रुख अपनाया जाएगा। जिले की सभी 511 ग्राम पंचायतों में बतौर सचिव कार्यरत ग्राम पंचायत अधिकारियों एवं ग्राम विकास अधिकारियों को 8 फरवरी तक पूर्व में आवंटित राशि की दो किस्तों के खर्च की सत्यापित कार्यपूर्ति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। साथ ही चेताया गया है कि तय मियाद तक खर्च राशि की सत्यापित कार्यपूर्ति न देने वाले ग्राम सचिवों पर धन के दुरुपयोग का मामला दर्ज कर रिकवरी की कार्रवाई होगी।
जिला पंचायत राज अधिकारी दिनेश सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायतों में बतौर ग्राम सचिव कार्यरत अधिकारियों को वित्तीय वर्ष 2010-2011 एवं 2011-2012 में राज्य वित्त आयोग एवं 13वें वित्त आयोग के तहत मिली धन राशि के खर्च का ब्यौरा अभी तक कई ग्राम पंचायतों ने जमा नहीं कराया है। इससे 13वें वित्त आयोग की मार्च में निर्गत की जाने वाली तीसरी किस्त जारी करने में परेशानी आ रही है। इसके चलते ही अब खर्च राशि का हिसाब न देने वाली पंचायतों के खिलाफ कड़ा रवैया अख्तियार करते हुए एडीओ पंचायत की इसके लिए सीधे तौर पर जवाबदेही भी तय की गई है। सभी ब्लॉक में तैनात एडीओ पंचायतों से अपने-अपने क्षेत्र में आने वाली पंचायतों की लंबित समायोजन व कार्यवृत्ति रिपोर्ट तीन दिन में जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध कराने को कहा गया है। कार्यवृत्ति रिपोर्ट सहायक विकास अधिकारियों (पंचायत) से सत्यापित कराना भी अनिवार्य होगा।