लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट में महिला कैंसर क्लीनिक शुरू होगा। पांच फरवरी को क्लीनिक का उद्घाटन चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन करेंगे। इस मौके पर पर महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा) और ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग कैंप का भी शुभारंभ होगा। इस एकदिवसीय कैंप में मेमोग्राम, पेप स्मीयर की नि:शुल्क जांच की जाएगी। इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो.एम.सी.पंत ने बृहस्पतिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में इस संबंध में जानकारी दी। प्रो. पंत ने बताया कि हर साल तीन लाख महिलाएं सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा) की चपेट में आती हैं। इसका मुख्य कारण ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) है। महिलाओं में होने वाले कैंसर के मामलों में सबसे ज्यादा मामले सर्वाइकल कैंसर के पाए जाते है, लेकिन पेप स्मीयर टेस्ट से इस कैंसर का पता लगाया जा सकता है। सामान्य तौर पर सर्विक्स में उत्पन्न हुए असाधारण परिवर्तनों से कैंसर बनने में करीब दस वष लगते हैं। इसलिए उपचार का पर्याप्त समय मिल जाता है। पैथोलॉजी विभाग की हेड प्रो. नुजहत हुसैन ने बताया कि 30 से 60 वर्ष की सभी महिलाओं को साल में एक बार पेप स्मीयर जांच जरूर करानी चाहिए। इसकी जांच मात्र पांच मिनट में हो जाती है। इससे गर्भशय ग्रीवा में आए बदलावों का पता चल जाता है और समय रहते कैंसर का इलाज किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि चार फरवरी को सर्विक्स और ब्रेस्ट कैंसर की जानकारी देने के लिए एक जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलगे दिन नि:शुल्क स्क्रीनिंग कैम्प चलाया जाएगा। स्क्रीनिंग के लिए पंजीकरण 1 फरवरी से शुरू होंगे। इस मौके पर रेडिएशन आंकोलॉजिस्ट प्रो.एम.एल.बी.भट्ट भी मौजूद थे।
पैथोलॉजी जांच का स्टेट रेफरल सेंटर बनाने का प्रस्ताव ः डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट को पैथोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री, हिस्टोपैथोलॉजी आदि जांचों के लिए स्टेट रेफरल सेंटर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इस प्रस्ताव में सभी जिलों से खून, पेशाब, बायोप्सी आदि जांचें लोहिया इंस्टीट्यूट में करने का प्रस्ताव दिया गया है। सभी जिला अस्पतालों से नमूने लेकर लोहिया इंस्टीट्यूट लाए जाएंगे और अत्याधुनिक लैब में उसकी जांच होगी। इसके बाद रिपोर्ट ऑन लाइन संबंधित जिला अस्पतालों में भेज दी जाएंगी। इससे सभी जिलों में अत्याधुनिक जांच की सुविधा कम शुल्क में मिल सकेगी। इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो.एम.सी.पंत ने बताया कि प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पतालों सामान्य कल्चर टेस्ट भी नहीं होते हैं। सभी जांचें निजी पैथोलॉजी को भेजी जाती हैं। यदि स्टेट रेफरल सेंटर बनाने की अनुमति शासन से मिल जाती है तो लोहिया इंस्टीट्यूट प्रदेश में सस्ती और गुणवत्तापरक जांच सुविधाएं उपलब्ध करा सकेगा।