लखनऊ। ‘मैडम, हमारे फोन पर कोई दो हफ्ते से बार-बार कॉल करके हमें परेशान कर रहा है, (स्ट्रेस लेवल-1)। दिन-रात फोन करता है (स्ट्रेस लेवल-2) और बात करने के लिए कहता है (स्ट्रेस लेवल-3)। (...रोने की आवाज) (स्ट्रेस लेवल-5) हम परेशान हैं, घर में कहेंगे तो शायद कॉलेज जाना ही बंद करवा दिया जाएगा (स्ट्रेस लेवल-6)। समझ नहीं आ रहा क्या करें, फोन करने वाले को समझाया कि हमें तंग न करे (स्ट्रेस लेवल-7), लेकिन अब वो हमें मिलने के लिए कहता है (स्ट्रेस लेवल-9)।’ कुछ इसी तरह के 600 से 900 कॉल्स रोजाना राजधानी की वीमेन पावर लाइन नंबर 1090 पर आ रहे हैं। फोन पर पीड़िता द्वारा दी गई जानकारियों, उसकी मनोदशा और हालात के अनुसार पावर लाइन पर उससे बात कर रही महिला पुलिसकर्मी ‘स्ट्रेस लेवल’ तय करती है। ‘स्ट्रेस लेवल’ जितना बढ़ेगा, दोषी को पुलिस उतनी ही सख्त टोन में चेतावनी देगी। डीआईजी नवनीत सिकेरा ने शनिवार को इस बारे में विस्तृत जानकारी देने के साथ ही पावरलाइन के भावी विस्तार के बारे में बताया। देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी पावरलाइन की विजिट के लिए आने वाली थीं। इसी सिलसिले में डीआईजी अपनी पुलिस टीम के साथ यहां पहुंचे थे, लेकिन देरी की वजह से किरण बेदी नहीं आ सकीं।
16 हजार मामलों में लड़कियों को दिलाई राहत ः डीआईजी सिकेरा ने बताया कि अब तक वीमन पावर लाइन 16 हजार मामलों में लड़कियों को राहत दे चुकी है। कई लड़कियां सिर्फ इसीलिए धन्यवाद कहने के लिए फोन करती हैं कि उन्हाेंने 1090 में शिकायत की धमकी दी तो मनचले ने तंग करना छोड़ दिया। वहीं पावर लाइन सॉफ्टवेयर के ‘स्ट्रेस लेवल’ मैकेनिज्म के बारे में उन्हाेंने बताया कि हर परेशान लड़की के तनाव का स्तर अलग-अलग होता है। पुलिस के लिए यह जानना जरूरी है कि उसकी परेशानी किस स्तर पर है। स्ट्रेस मीटर इसे जांचने में मदद करता है। लड़कियां अपनी बात रखती जाती हैं और कॉल सुन रही महिला पुलिसकर्मी उसी के अनुसार स्ट्रेस लेवल को आंककर उसे बढ़ाती है। जितना स्ट्रेस लेवल आता है, पुलिस उसी टोन में तंग कर रहे मनचले को चेतावनी देती है।
बढ़ाने होंगे कंप्यूटर, वर्कफोर्स का करना होगा विस्तार ः डीआईजी सिकेरा ने बताया कि फिलहाल यह पावर लाइन अपने दूसरे चरण में है। अगले दो महीने में इसका तीसरा चरण शुरू हो जाएगा। इसके बाद पावर लाइन पर उत्तर प्रदेश की लड़कियां सभी तरह की शिकायतें दर्ज करवा सकेंगी, चाहे कोई उन्हें राह चलते छेड़ रहा हो या किसी और तरीके से परेशान कर रहा हो। डीआईजी ने बताया कि फिलहाल भी ऐसे मामले लिए जा रहे हैं, लेकिन इसके लिए पावर लाइन के विस्तार की जरूरत है। उन्हाेंने बताया कि पहले चरण में 20 कंप्यूटर लगाए गए थे, अब इनकी संख्या 50 हो गई है। इसी अनुपात में शिकायतों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। कुछ कॉल तुरंत ही मिस हो जाती हैं, जिन्हें कवर करने के लिए जल्द कंप्यूटरों व वर्कफोर्स का विस्तार करना होगा। टीम को लगातार आधुनिक भी किया जा रहा है। यहां काम कर रही पुलिसकर्मियों को आधुनिक यूनिफॉर्म दी गई है।