लखनऊ। डेंटल कॉलेज खोल कर मुनाफ कमाने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण के लिए डेंटल काउंलिस ऑफ इंडिया (डीसीआई) ने कड़ा रुख अपनाया है। पिछले एक साल में डेंटल कॉलेज खोलने की अनुमति के लिए आए 110 आवेदनों को खारिज किया गया है। मानक पूरे करने वाले सिर्फ 10 डेंटल कॉलेजों को ही शुरू करने की अनुमति दी गई है। लंबे समय से नए डेंटल कॉलेज खोलने पर रोक लगी हुई थी। डीसीआई के अध्यक्ष डॉ. दिब्येंदु मजूमदार ने बीबीडी कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज के कॉलेज डे में सोमवार को ये बात कही। डॉ. मजूमदार ने बताया कि देश में डेंटल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया में डीसीआई को ऐसी भूमिका दी गई है जैसे किसी की शादी कर दी जाए और फिर पूछा जाए कि क्या शादी करना चाहते हो? ये गलत प्रक्रिया है। सबसे पहले डीसीआई के पास आवेदन आना चाहिए। जबकि उसके उलट कॉलेज खोलने के लिए पहले यूनिवर्सिटी से संपर्क किया जाता है फिर सरकार से अनुमति ली जाती है और आखिर में डीसीआई से अनुमति की बारी आती है। डॉ. मजूमदार ने बताया कि काउंसिल केंद्र सरकार से कह चुकी है कि डेंटल कॉलेज सिर्फ मेडिकल कॉलेजों में खोलने की अनुमति दी जाए। इसके पीछे तर्क था कि बिना मरीजों से उनकी समस्याएं जाने कोई भी अच्छा चिकित्सक नहीं बन सकता। केजीएमयू में रोजाना पांच सौ मरीज आते हैं या रिफर किए जाते हैं लेकिन सिर्फ डेंटल कॉलेज होने पर विद्यार्थियों को ये अनुभव नहीं मिल पाएंगे। देश में हर साल करीब 25 हजार डेंटिस्ट तैयार हो रहे हैं, लेकिन पोस्ट ग्रेजुएशन में 25 प्रतिशत भी सीटें नहीं हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लेक्चर्स के लिए प्रस्ताव ः डॉ. मजूमदार ने बताया कि देश के सभी डेंटल कॉलेजों से संपर्क करके उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ने के लिए पूछा गया है। जो संस्थान सहमति देंगे वहां के विद्यार्थियों को लाइव लेक्चर्स से लेकर विद्वानों की बात सुनने का मौका मिलेगा। साथ ही उन्हाेंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डेंटिस्टों की नियुक्ति को भी रोजगार के विकल्प बढ़ाने के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि डीसीआई की जनरल काउंसिल ने इसके लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटर्नशिप इस दिशा में महत्वपूर्ण है, इससे ग्रामीण रोगियों को फायदा होगा।