लखनऊ। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में अनियमितताओं की शिकायत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या मानव संसाधन विकास मंत्रालय से सीधे करनी भारी पड़ सकती है। बीबीएयू प्रशासन ने इस संदर्भ में सर्कुलर जारी कर शिकायतकर्ताओं को अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसके लिए बीबीएयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पत्र का सहारा लिया है।
बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की व्यवस्था पिछले छह महीने से कार्यवाहक निजाम के भरोसे है। विश्वविद्यालय में शैक्षिक, प्रशासनिक एवं वित्तीय गड़बड़ियों की सैकड़ों शिकायतें शिक्षक, कर्मचारियों एवं अन्य मंचों से यूजीसी, एमएचआरडी और राष्ट्रपति तक से हो चुकी है। राष्ट्रपति भवन से इस संदर्भ में विश्वविद्यालय प्रशासन को कारण बताओ नोटिस भी जारी की गई थी। इन शिकायतों के चलते बीबीएयू प्रशासन को कई बार असहज स्थितियों का सामना करना पड़ा है। विश्वविद्यालय के साथ ही बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों की साख भी दांव पर लग चुकी है। हालांकि बीबीएयू प्रशासन ने भी जवाबी कार्रवाईयों में कोई कसर नहीं छोड़ी है। विभिन्न नियमों का आधार लेकर शिकायत करने वाले कई शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पर बीबीएयू प्रशासन ने कतर दिए। इसमें निलंबन, वेतन कटौती और इन्क्रीमेंट रोेके जाने जैसे हथकंडे शामिल हैं। फिलहाल रजिस्ट्रार ने एक और सर्कुलर जारी कर कहा है कि ऐसा पाया गया है कि छात्र, शिक्षक, कर्मचारी या अन्य सदस्यों एवं अनाधिकृत संगठनों द्वारा नियमों, निर्देशों, नियुक्ति, प्रोन्नति आदि व्यक्तिगत समस्याओं को लेकर सीधे एमएचआरडी एवं यूजीसी से सीधे शिकायत की जा रही है और प्रत्यावेदन भेजे जा रहे हैं। यह कार्यालयी प्रक्रिया का उल्लंघन है और शिक्षकों एवं कर्मचारियों के खिलाफ इसको लेकर अनुशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। रजिस्ट्रार ने यूजीसी के एक पत्र का हवाला दिया है जिसमें शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्रों को सीधे यूजीसी से संपर्क न करने का निर्देश दिया गया है।