लखनऊ। गाजीपुर थाना क्षेत्र में भट्ठा मालिक के बेटे ने नए साल की पहली शाम खुद को कमरे में बंद करके पिता की लाइसेंसी पिस्टल से कनपटी पर गोली मार ली। फायर की आवाज सुनकर परिवार वाले दौड़े। दरवाजा तोड़ा और खून से लथपथ पड़े युवक को ट्रॉमा सेंटर ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने पिस्टल कब्जे में लेकर तहकीकात शुरू की तो पता चला कि शराब पीकर लौटे युवक को उसकी मां ने टोका था, जिसके बाद उसने ये कदम उठा लिया।
पुलिस के मुताबिक, इंदिरानगर के डी-ब्लॉक में भट्ठा मालिक गुरु प्रसाद गुप्ता के बेटे शेखर गुप्ता उर्फ गोलू (24) ने मंगलवार शाम परिवार वालों से नोकझोंक की। इसके बाद पिता की लाइसेंसी पिस्टल लेकर अपने कमरे में गया और दरवाजा भीतर से बंद करके कनपटी पर गोली मार ली। फायर की आवाज सुनकर परिवार वालों ने दरवाजा तोड़ा। कमरे में खून से लथपथ पड़े शेखर को ट्रॉमा सेंटर ले गए और पुलिस को सूचना दी। डॉक्टरों ने शेखर को मृत घोषित करके शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने खुदकुशी में इस्तेमाल पिस्टल कब्जे में लेकर कमरा खंगाला। कोई सुसाइड नोट न मिलने पर परिवारवालों व वाचमैन से पूछताछ की।
सीओ गाजीपुर विशाल पाण्डेय ने बताया कि साल भर पहले देहरादून से एमबीए की पढ़ाई पूरी करके लौटा शेखर अपने पिता के कारोबार में हाथ बटाता था। उसे शराब की लत लग गई थी। नववर्ष की पूर्व संध्या पर उसने खूब शराब पी थी और मंगलवार शाम भी नशे में धुत होकर घर लौटा। इस पर मां रानी गुप्ता ने उसे टोका और डांट लगाई तो वह भड़क उठा। शेखर को मां से नोकझोंक करते देख बड़े भाई विपिन उर्फ शिशु ने भी उसे डांटा। इस पर शेखर अपने कमरे में गया और दरवाजा भीतर से बंद करके खुद को गोली मार ली। परिवारवालों ने पुलिस को जानकारी दी कि गुरु प्रसाद एक मुकदमे की पैरवी के सिलसिले में सोमवार को इलाहाबाद गए थेे और मंगलवार देर शाम तक उन्हें लौटना था।
ऐसी उम्मीद न थी
बेटे की मौत पर बिलख रही रानी गुप्ता ने बताया कि नशे के कारण अवसाद का शिकार बने शेखर का इलाज कराया जा रहा था। वह शराब पीने के बाद परिवार वालों से झगड़ता रहता था, लेकिन किसी को नहीं पता था कि वह खुदकुशी कर लेगा। गुरु प्रसाद व रानी का शेखर मंझला बेटा था। बड़ा बेटा विपिन और छोटी बेटी अंकिता है। गुरु प्रसाद के नाम दो शस्त्र लाइसेंस हैं। इनमें एक रायफल और एक पिस्टल है। मुकदमे के सिलसिले में इलाहाबाद जाते समय वह दोनों हथियार घर में सुरक्षित रख गए थे।
घर में हुआ था झगड़ा
वाचमैन लालमन चौहान ने पुलिस को बयान दिया कि वह शाम को ड्यूटी मुस्तैद था। इस बीच घर में झगड़े की आवाज सुनाई थी। शेखर ऊंची आवाज में बोल रहा था। कुछ समय बाद तकरार बंद हुई और इसके बाद फायर की आवाज सुनाई दी। घर में चीखपुकार सुनकर वह भी दौड़ा। कमरे का दरवाजा तोड़ने और घायल शेखर को उठाकर गाड़ी से अस्पताल भिजवाने में मदद की।