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पांच पुलिस कर्मियों के कंधे पर 46 जिलों का साइबर क्राइम

Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
Lucknow
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लखनऊ। मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश में साइबर क्राइम पर नियंत्रण के लिए बनाया गया साइबर सेल अभावों से जूझ रहा है। 46 जिलों के करोड़ों लोगों को साइबर अपराधों से बचाने और आरोपियों का पता लगाने के लिए यहां मात्र पांच पुलिसकर्मियों की टीम ही काम कर रही है। इसके अलावा यहां आधुनिक तकनीकी सुविधाओं की भी कमी है। अक्तूबर 2011 में साइबर सेल लखनऊ की स्थापना के बाद से अब तक यहां करीब 950 शिकायतें आ चुकी हैं। ये सभी शिकायतें फाइनेंशियल, बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड और अन्य साइबर अपराधों से जुड़ी हैं। लखनऊ साइबर सेल ने कुछ मामले सुलझाए भी हैं लेकिन जिस तेजी से नये मामले आ रहे हैं, उससे अपराधों पर अंकुश लगाने और अपराधियों को पकड़ने में पांच लोगों की टीम काफी नहीं पड़ रही। सेल में हजरतगंज कोतवाली के एसएचओ बतौर प्रभारी नियुक्त हैं और साथ काम करने के लिए एक एसआई और तीन कॉन्स्टेबल दिए गए हैं। सिर्फ सोशल नेटवर्किंग साइट से जुड़े फ्रॉड के रोज 20-25 केस टीम के पास पहुंचते हैं। अधिकतर मौकों पर तो पुलिस केवल मामले दर्ज करके ही रह जाती है और पीड़ितों को कोई फायदा नहीं पहुंचता। इन सबका कारण मैन पावर की कमी ही है। इसके अलावा साइबर सेल से जुड़े अधिकारी भी साइबर सिक्योरिटी के प्रति उदासीन हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अक्तूबर में पुलिस विभाग द्वारा आयोजित साइबर सिक्योरिटी जागरूकता वर्कशॉप में थानों और साइबर सेल के प्रतिनिधि अनुपस्थित रहे।
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बाहर के मामले आने में होती है देरी ः जानकारों के अनुसार सेल के अधीन लखनऊ के बाहर वाले जिलों में हो रहे साइबर क्राइम के 90 प्रतिशत मामले सेल तक पहुंच नहीं पा रहे। कुशीनगर के रिटायर्ड शिक्षक के बैंक खाते से 9.38 लाख रुपये ठगे जाने की शिकायत ढाई महीने बाद सेल में पिछले बुधवार को दर्ज हुई। पीड़ित ओपी श्रीवास्तव के अनुसार उन्होंने क्षेत्रीय पुलिस को मामले की तत्काल जानकारी दी थी। तब पुलिस ने साफ किया था कि मामला साइबर सेल को भेजा जाना चाहिए। श्रीवास्तव के अनुसार आईओ ने तो आईटी एक्ट की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया था तो मामला कैसे दर्ज करता?
ज्यादा सब-इंस्पेक्टरों की जरूरत है ः साइबर सेल प्रभारी दिनेश यादव स्वीकारते हैं कि मामलों की संख्या को देखते हुए टीम के विस्तार की जरूरत है। सेल को सब इंस्पेक्टरों की जरूरत है। साइबर क्राइम के तहत मामला दर्ज करने के लिए कम से कम एसआई या उससे ऊपर की रैंक के पुलिसकर्मी चाहिए। कई मामलों में फॉलोअप हो पाए इससे पहले ही नये मामले आ जा रहे हैं और मौजूदा टीम उन्हें समझने और रजिस्टर करने में जुट जाती है। ऐसे में पुराने मामलों के फॉलोअप भी कम हो रहे हैं।
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