लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विवि में दो नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोले जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसमें मुख्य तौर पर भूमि अधिग्रहण कानून की पेचीदगी दूर करने व महिला अपराध के बढ़ते ग्राफ पर रोकथाम के लिए प्रभावी कानून तैयार किए जाने पर अध्ययन होगा और विशेषज्ञों के मशविरे पर दोनों ही विषय से संबंधित नए प्रस्तावित कानून का एक ड्राफ्ट तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।
विवि प्रशासन ने इस संबंध में शासन को भेजे प्रस्ताव के माध्यम से दोनों एक्सीलेंस सेंटरों की स्थापना व संचालन मद में खर्च होने वाली राशि के बतौर 41.60 लाख रुपये की स्वीकृत की मांग की है। 23 नवंबर को राज्य विश्वविद्यालयों से जुड़े मसले सुलझाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग में होने वाली बैठक में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रस्ताव पर चर्चा के बाद संस्तुति की उम्मीद है। विवि की कुलसचिव अनीता मिश्रा की तरफ से उच्च शिक्षा विभाग को भेजे पत्र में दो अलग-अलग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है। इसमें सेंटर फॉर लॉ एंड जस्टिस के तहत उत्तर प्रदेश में भूमि अधिग्रहण विधियों के वर्तमान स्वरूप व आलोचनात्मक विश्लेषणात्मक अध्ययन होगा। एक वर्ष की अवधि में क्रियाशील होने वाले इस सेंटर पर खर्च के लिए 20 लाख के वित्तीय अनुदान की मांग की गई है। प्रस्तावित सेंटर में भूमि अधिग्रहण संबंधी विवादों का न्यायसंगत हल निकालने के लिए उचित व्यवस्था अथवा तंत्र विकसित करने, भूमि अधिग्रहण में राज्य की भूमिका, भू-स्वामियों व कृषकों के हितों की रक्षा करने के विस्तृत अध्ययन के आधार पर विवाद रहित नए भूमि अधिग्रहण कानून का प्रस्तावित ड्राफ्ट तैयार कर शासन को भेजने का कार्य होगा।
इसी तरह विवि में प्रस्तावित दूसरे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए 21.60 लाख की वित्तीय संस्तुति देने की मांग की गई है। इस सेंटर में मुख्य तौर पर सेंटर फॉर क्रिमिनल जस्टिस एडमिनिस्ट्रेशन के तहत प्रदेश में महिला अपराध पर आलोचनात्मक व विश्लेषणात्मक अध्ययन कर नए महिला सुरक्षा कानून का ड्राफ्ट तैयार कराया जाएगा।