लखनऊ। एसजीपीजीआई स्थित रेलवे आरक्षण केंद्र पर रविवार को यात्रियों को इंतजार करा दलालों के टिकट बनाने से लाइन में लगे डॉक्टर व कर्मचारी भड़क उठे। डॉक्टरों ने दलाल को दौड़ा लिया और आरक्षण कर्मी को जमकर खरी खोटी सुनाई। इस दौरान रेल कर्मी ने भरे हुए आरक्षण फार्म को छिपाकर रख लिया। इसको लेकर आधे घंटे तक लाइन में खड़े यात्रियों व रेल कर्मी के बीच बहस होती रही।
इस मौके पर मौजूद रेजीडेंट डॉ. अमरेश कुमार ने बताया कि वह सुबह 11 बजे से लाइन में लगे थे। उस दौरान लाइन में सिर्फ आठ-दस लोग थे। 11.30 बजे के आसपास जब उनका नंबर आया तो उसी दौरान एक युवक कई भरे हुए आरक्षण फार्म लेकर आरक्षण बाबू के पास आया और उसको देकर जाने लगा। तभी बाबू ने उसे रुकने का इशारा किया। उन्होंने अपना आरक्षण फार्म बढ़ाया तो बाबू ने उसे नहीं लिया। वह किनारे खड़े व्यक्ति द्वारा दिये गए बंडल से फार्म निकालकर टिकट बनाने लगा। इस पर डॉ अमरेश व अन्य यात्रियों ने विरोध किया। उनका कहना था कि जब वह लाइन में लगे हैं तो अचानक बीच में आए व्यक्ति के टिकट कैसे बनने लगे। इस पर वहां खड़े दलाल व रेल कर्मी ने विरोध करने वाले डॉक्टर को डपट दिया। इसको लेकर यात्रियों ने विरोध शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने बताया कि बीच में फार्मों का बंडल देने वाला व्यक्ति टिकट दलाल है। ड्यूटी पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड अमीन चंद्र ने भी कहा कि यह नाटक रोज का है। इसलिये उसने दखलंदाजी करना बंद कर दिया है। इस पर नाराज डॉक्टरों ने दलाल को दौड़ा लिया। हंगामा शुरू हो गया और इस बीच वह दलाल भागने में कामयाब हो गया। डॉक्टरों ने आरक्षण केंद्र पर तैनात बाबू को जमकर खरी-खोटी सुनायी। हंगामा होते देख अन्य लोग भी वहां पहुंचे और फिर किसी तरह मामला शांत हुआ। डॉक्टरों ने रेलवे अधिकारियों से इस बाबत शिकायत करने की बात कही है। सूत्रों के मुताबिक सामान्य टिकट के एवज में आरक्षण बाबू बीस रुपये लेते हैं जबकि तत्काल टिकट कराने के एवज में दो सौ रुपये लिए जाते हैं।
पहले भी पकड़ी जा चुकी है टिकटों की दलाली
राजधानी के आरक्षण केंद्रों पर टिकटों की दलाली नयी बात नहीं है। चंद महीनों पहले पीजीआई केंद्र पर ही टिकटों की दलाली पकड़ी जा चुकी है। यहां तक कि दलालों तक पहुंची आरपीएफ भी भ्रष्टाचार में लिप्त हो गई। मामले की जांच कर रहे आरपीएफ सिटी स्टेशन के पोस्ट कमांडर मनोज सिंह को दलाल से घूस के सत्तर हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। उस दौरान भी यहां वही कर्मचारी तैनात थे जो वर्तमान में कार्य कर रहे हैं। आरक्षण कर्मियों पर आरोप था कि वह एक फार्म पर कई ट्रेनों के टिकट बना दिये थे जबकि कुछ आरक्षण फार्म गायब थे। इस मामले की जांच ठंडे बस्ते में चली गई। आरपीएफ की सीआईबी विंग भी कई बार दलालों को रंगे हाथ पकड़ चुकी है लेकिन आज तक कोई अंकुश नहीं लग सका। पीजीआई ही नहीं शहर के अन्य केंद्रों पर भी ऐसे मामले पहले सामने आ चुके हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण यह गोरखधंधा रुक नहीं रहा।
वहीं उत्तर रेलवे के सीनियर डीसीएम अश्विनी कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जांच सोमवार को कराई जाएगी। अगर सही पाया जाता है तो संबंधित आरक्षण कर्मी को जवाब देना होगा। दोषी पाये जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वह आरक्षण केंद्र डॉक्टरों व मरीजों के तीमारदारों को सुविधा हो उस लिये खोला गया था।