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अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए...

Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
Lucknow
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लखनऊ। ‘अब तो मजहब कोई ऐसा भी चलाया जाए, जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए...।’ कवि और गीतकार गोपालदास नीरज ने जब ये गीत सुनाया तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। राष्ट्रीय पुस्तक मेला के सांस्कृतिक पंडाल में शुक्रवार शाम ढाई आखर प्रेम का काव्य समारोह हुआ। श्रोताओं की मांग पर नीरज ने कई रचनाएं सुनाईं। नीरज जैसे ही मेला स्थल पर पहुंचे, लोगों ने उन्हें घेर लिया। लोग उनके साथ फोटो खिंचवाने और उनका ऑटोग्राफ लेने को बेताब थे। समारोह में नीरज ने प्रेम पर लंबा व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि अगर कुछ भी जोड़ता है तो वह प्रेम है। जब तक प्रेम नहीं होगा जुड़ाव नहीं होगा। काव्य समारोह की खास बात ये रही कि इसमें हास्य-व्यंग्य और वीर रस के कवियों ने शृंगार के गीत सुनाए। समारोह का संचालन कर रहे हास्य-व्यंग्य के प्रमुख कवि सर्वेश अस्थाना ने सुनाया ‘तुमने पत्र जलाया होगा प्रेम प्रमाण मिटाने को, चलो बहाना ये भी अच्छा अपने ही समझाने को।’ इस मौके पर पृथ्वीराज चौहान, पंकज प्रसून, सुरेश उजाला, अमन दलाल, गौरव दीक्षित मासूम, चन्द्रेश सिंह, नीलम चन्द्रा, अरविन्द झा ने भी कविताएं सुनाईं। इस मौके पर नीरज के साथ डॉ. मधु गुप्त, जूही सिंह, चन्द्रकिशोर रस्तोगी, बीना बंसल को सम्मानित किया गया। इसके पूर्व मेला में शोभा त्रिपाठी के कथा संग्रह ‘चांद का शहद’ का लोकार्पण हुआ। मेला में शिवमूर्ति, वीरेन्द्र सारंग और एमआर अंसारी ने कहानियां पढ़ीं।
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स्टूडेंट्स को आधी दामों में किताबें ः राष्ट्रीय पुस्तक मेला में हरिओम शर्मा हरि की व्यक्तित्व विकास की पुस्तकें टीचर्स और स्टूडेंट्स को आधी कीमत पर मिलेंगी जबकि अन्य लोगों को इन पुस्तकों पर 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। मेले में लखनऊ पर आधारित पुस्तकों की खूब मांग हैं। गुजिस्तां लखनऊ के अतिरिक्त लखनऊ पुस्तक मेला शृंखला की पुस्तकें भी खूब बिक रही हैं। योगेश प्रवीन की अवध की बेगमें, लखनऊ की शायरी, लखनऊनामा, पीली कोठी जैसी पुस्तकों की भी मांग है।
शोभा को लोपमुद्रा सम्मान ः लोपमुद्रा सम्मान 2012 के लिए कथाकार शोभा श्रीवास्तव को चुना गया है। यह सम्मान उन्हें शनिवार को पुस्तक मेले में ही आयोजित समारोह में दिया जाएगा। 2009 में यह सम्मान कुसुम नारायणी को, 2010 में सुशीला देवी को और 2011 में नीलम सिंह को दिया गया था।
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