राजधानी से रविवार को आखिरी तार छह महीने के नमन की ओर से पीएम मनमोहन सिंह को भेजा गया।
स्वामी विवेकानंद की लाइनों से शुरू संदेश में कहा गया है कि ’वह बगैर घबराए नेक राह पर चलते रहें।’
दरअसल 163 सालों से लोगों को अच्छी और बुरी खबर देती आ रही टेलीग्राम सेवा रविवार से बंद हो गई। अंतिम टेलीग्राम को संग्रहालय में रखा जाएगा।
हालांकि इतनी पुरानी सर्विस के बंद होने पर शहर के लोगों में कुछ मायूसी भी थी।
'बेटे को अहमियत समझाना चाहता हूं'
लालबाग के राजीव गुप्ता कहते हैं कि मुझे उम्मीद थी कि आज आखिरी दिन था, लोगों की काफी भीड़ होगी। लेकिन दूसरे शहरों के मुकाबले यहां कम लोग दिखे। अपने बेटे से मैंने चलने को कहा, तो उसने आने से मना कर दिया।
फिर भी उसकी याद के लिए मैं जीपीओ आकर उसे टेलीग्राम भेज रहा हूं। ताकि वह जान सके कि इस सेवा के क्या मायने थे। अलीगंज में रहने वाली बीटेक छात्रा आरुषि कौशिक ने भी याद के तौर पर अपने दस रिश्तेदारों को टेलीग्राम भेजे।
लोग दुखी भी हुए
डालीबाग निवासी आरके कक्कड़ और किरन कक्कड़ ने कोलकाता में रह रहे अपने नाती पुलकित खन्ना को टेलीग्राम के इतिहास का हिस्सा बनाने के लिए संदेश भेजा। आरके कक्कड़ बोले कि लाखो करोड़ों लोगों के लिए यह सेवा बहुत काम की साबित हुई। अब इसके बंद होने पर काफी दुख हो रहा है।
386 लोगों ने भेजे तार
बेटा तुझे मेरी जिंदगी और सर्विस का आखिरी टेलीग्राम है। बीएसएनएल में सीनियर टेलीकॉम ऑपरेटिंग असिस्टेंट के पद पर कार्यरत पीएन रमन गुड़गांव में बेटे आनंद कुमार को यह तार भेजने के साथ इतिहास में दर्ज हो गए।
टेलीग्राम सेवा खत्म होने के आखिरी दिन शहर के 386 लोगों ने अपनों को तार भेजा। इनमें से ज्यादातर का मकसद तार सेवा को यादों में सहेजना था।