बहुचर्चित रपड़ा कांड में चार लोगों की हत्या, डकैती और आगजनी के 16 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई है।
अपर जिला जल सुरेश चंद्रा की अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका है।
जातीय संघर्ष के चलते हुए इस जघन्य हत्याकांड में 23 लोगों के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। छह अभियुक्तों की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई जबकि एक आरोपी को न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
थाना जैतीपुर के गांव रपड़ा (अब थाना गढ़िया रंगीन) में एक बिरादरी के लोगों पर 14 जुलाई 1990 को दो-तीन गांवों के लोगों ने हमला कर दिया था। हमलावरों में अधिकतर दूसरी बिरादरी के थे। रामगंगा नदी के किनारे स्थित गांव रपड़ा उस समय बाढ़ की चपेट में था।
हमलावरों ने चार लोगों की हत्या कर लाशें नदी में बहा दी थीं। दो दिन बाद लाशें बरी प्रसिद्धपुर गांव के पास नदी से बरामद हुईं थीं। रपड़ा निवासी राजकिशोर ने 22 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मुकदमे के दौरान मुख्य आरोपी राम सिंह की वर्ष 1993 में हत्या कर दी गई।
इसके अलावा हत्यारोपी अहिवरन, ननकू, नौबत निवासी गांव माबड़, राम कुमार निवासी गांव बरी प्रसिद्धपुर और झंडू निवासी गांव कुड़रा मजरा थाना हजरतपुर (बदायूं) की मौत हो गई। राम भरोसे निवासी नगला देहात थाना गढ़ियारंगीन को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।