गंगा के जलस्तर में घटाव का सिलसिला रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। चार सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से पानी घटने का क्रम बना रहा। पानी घटने से एक तरफ जहां शहर के कई मार्गों पर आवागमन फिर से शुरू हो गए, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के कई मार्ग और गांव में बाढ़ का पानी लगा हुआ है। इससे इन स्थानों के लोगों की दुश्वारियां जारी हैं। पानी घटने से एक तरफ जहां लोग राहत की सांस ले रहे हैं वहीं उन्हें संक्रामक बीमारियों की भी आशंका सताने लगी है। जलस्तर में कमी होने की खुशी के बीच बाढ़ पीड़ित फिर से कहीं पानी न बढ़े, इसकी आशंका से परेशान हैं।
अट्ठारहैगस्त से गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह लगातार 25 अगस्त तक जारी रहा। तेजी से पानी बढ़ने से गंगा का स्वरूप पूरी तरह से बदल गया और चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई देने लगा। शहर के झुन्नूलाल चौराहा, ददरीघाट, स्टीमरघाट, झंडातर, शास्त्रीनगर, कचहरी मार्ग, तुलसियाका पुल, नवाबगंज आदि मार्गों के साथ ही कई इलाकों में पानी फैल गया, जिससे आवागमन करने वालों की फजीहत बढ़ गई। मकान के पानी से घिरने की वजह से अधिकांश लोग मकान छोड़कर इधर-उधर चले गए। तटवर्ती इलाकों के सैकड़ों गांव सहित दर्जनों मकान पूरी तरह से पानी से घिर गए। एक तरफ जहां अधिकांश लोग मकान छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए, वहीं मार्गों पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया था।
इसी क्रम में 25 अगस्त को गंगा के जलस्तर में कमी का क्रम शुरू हो गया। शहर के मार्गों को छोड़कर गंगा वापस लौटने लगीं। रविवार तक जिन मार्गों पर पानी लगा था, वह पूरी तरह से निकल गया, जिससे आवागमन करने वालों की परेशानियां दूर हो गईं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के गांव पानी से घिरे रहे, जिससे बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां बनी रही। जमानिया, रेवतीपुर, बारा, गहमर, मुहम्मदाबाद, भांवरकोल, करंडा सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिरे रहे। केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारी उमाशंकर राम ने बताया कि रविवार को चार सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से गंगा के जलस्तर में कमी का क्रम जारी रहा था। शाम चार बजे 64.300 जलस्तर रहा।
एक तरफ जहां जलस्तर में कमी से बाढ़ पीड़ितों में खुशी है, वहीं उन्हें इस बात का भय सता रहा है कि पानी घटने पर संक्रामक बीमारियां पांव पसारेगी। पानी घटने की खुशी के बीच बाढ़ पीड़ित यह भी आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि कहीं फिर से जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला शुरू न हो जाए, जिससे एक बार फिर से परेशानियों का सामना करना पड़े। बारा संवाददाता के अनुसार कर्मनाशा के तटवर्ती क्षेत्र के ग्रामीण बाढ़ की पीड़ा से अभी तक पूरी तरह से उबर नहीं पाये हैं। जैसे-जैसे पानी का स्तर गिर रहा है, वैसे संक्रामक रोगों के फैलने का सिलसिला शुरू हो गया है। करंडा संवादताता के अनुसार बाढ़ का पानी तो घट रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों की समस्याएं बढ़ रही हैं । पानी कम होने के साथ ही खर-पतवार एवं हरे पौधों की सड़ांध से लोग परेशान हैं । पशुओं को मिलने वाला हरा चारा भी नष्ट हो गया है। 80 प्रतिशत पशुपालक हरा चारा और घास के भरोसे ही पशुओं को पालते हैं। अब उनके सामने बहुत बड़ा संकट आ गया है।