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Aman Sehrawat: 'माता-पिता और देश को समर्पित है यह पदक', ओलंपिक में कांस्य जीतने के बाद बोले पहलवान अमन सहरावत

Sat, 10 Aug 2024 01:06 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस

सार

मैच के बाद उन्होंने पदक को अपने दिवंगत माता-पिता और पूरे देश को समर्पित किया। अमन ने बताया कि कांस्य पदक के मुकाबले में शुरुआती कुछ मिनटों में मुकाबला बराबरी का चल रहा था।
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अमन सहरावत - फोटो : PTI/UWW
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विस्तार
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पहलवान अमन सहरावत ने पुरुषों की 57 किग्रा भारवर्ग कुश्ती में कांस्य पदक जीत लिया है। उन्होंने पुअर्तो रिको के पहलवान डैरियन क्रूज को 13-5 से हरा दिया। पहले राउंड में ही अमन 6-3 से आगे चल रहे थे। दूसरे राउंड अमन ने इस बढ़त को और आगे बढ़ाया और क्रूज को कोई मौका नहीं दिया। इस तरह अमन सहरावत ने जीत हासिल की। अमन पेरिस ओलंपिक में भारत के एकमात्र पुरुष पहलवान थे। हालांकि, उन्होंने पदकों के सिलसिले को बरकरार रखा। भारत 2008 बीजिंग ओलंपिक के बाद से हर ओलंपिक में कुश्ती में पदक जीत रहा है।
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अमन सहरवात के गांव में उनका मैच देखते लोग - फोटो : Amar Ujala
2008 में सुशील कुमार ने कांस्य, 2012 में सुशील ने रजत और योगेश्वर दत्त ने कांस्य, 2016 में साक्षी मलिक ने कांस्य, 2020 टोक्यो ओलंपिक में बजरंग पूनिया ने कांस्य और रवि दहिया ने रजत पदक जीता था। अमन का यह पहला ओलंपिक था और उन्होंने अपने पहले ही ओलंपिक में कांस्य पदक जीत लिया है। इस ओलंपिक में कुश्ती में भारत का खाता खोला। विनेश फोगाट के डिसक्वालिफाई होने के बाद निराशा में डूबे भारत को उन्होंने खुशियां दी हैं।

अमन सहरवात के गांव में उनका मैच देखते लोग - फोटो : Amar Ujala
मैच के बाद उन्होंने पदक को अपने दिवंगत माता-पिता और पूरे देश को समर्पित किया। अमन ने बताया कि कांस्य पदक के मुकाबले में शुरुआती कुछ मिनटों में मुकाबला बराबरी का चल रहा था। हालांकि, बाद में उन्होंने निर्णायक बढ़त हासिल की। रणनीति के बारे में पूछे जाने पर अमन ने कहा- उतरा तो मैं स्वर्ण के लिए था, लेकिन सेमीफाइनल में जापानी पहलवान के खिलाफ मैं हैरान रह गया था। उन्होंने (हिगुची री) शुरू के कुछ मिनट में चार-पांच अंकों की बढ़त बना ली थी। इतने बड़े प्रतियोगिता में इस लीड को पीछे करना आसान नहीं है। इस मैच में मैं शुरू से सोच कर आया था कि ज्यादा गैप नहीं करना है। शुरू में अंक क्लोज रखना है और आखिर में जाकर गैप बनाना है। 

अमन सहरवात के दादा मांगेराम और ताऊ सुधीर - फोटो : Amar Ujala
अमन ने कहा- मुझे अपने देश के लिए पदक जीते हुए काफी समय हो गया था। मुझे इसके बारे में कुछ करना था। मैं भारत के लोगों से कहना चाहता हूं कि मैं 2028 में आपके लिए स्वर्ण पदक जरूर जीतूंगा। बचपन में मैंने अपने माता-पिता को खो दिया और मेरे दादा ने मेरा पालन-पोषण किया था। लक्ष्य स्वर्ण था, लेकिन इस बार मुझे कांस्य से संतोष करना पड़ा। मुझे सेमीफाइनल की हार को भूलना था। मैंने खुद से कहा इसे जाने दो और अगले पर ध्यान केंद्रित करो। सुशील पहलवान जी ने दो पदक जीते, मैं 2028 में जीतूंगा और फिर 2032 में भी।
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अमन सहरावत - फोटो : PTI/UWW
कोच जगमेंदर सिंह और वीरेंदर दहिया ने कहा कि सहरावत के वजन पर नजर रखने के लिए उन्होंने जागकर गुजराती रात बिताई। उन्होंने कहा- हमें उनका वजन कम करने के लिए विशेष सावधानी बरती। हम हर घंटे उनका वजन जांचते रहे हैं। हम पूरी रात सोए नहीं।'
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