बजरंग पूनिया ने शनिवार को खेल मंत्रालय से अनुरोध किया कि देश में कुश्ती गतिविधियां फिर शुरू कराई जाएं क्योंकि पेरिस ओलंपिक में सात महीने ही रह गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ओलंपिक की तैयारियों को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है।
इस पूरे साल भारत में कुश्ती काफी चर्चा में रहा। हालांकि, ऐसा सकारात्मक वजहों से नहीं बल्कि पहलवानों के धरने और कुश्ती संघ के अध्यक्ष पर लगे आरोपों की वजह से रहा। कुश्ती संघ को एक बार फिर निलंबित कर दिया गया है और तदर्थ समिति कुश्ती की देखरेख कर रही है। छह महीने बाद पेरिस में ओलंपिक होना है। ऐसे में पहलवान अब उस जगह से ध्यान हटाकर कुश्ती में लगाना चाहते हैं।
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इस बीच ओलंपिक पदक विजेता पहलवान और धरना देने वाले पहलवानों में शामिल रहे बजरंग पूनिया ने शनिवार को खेल मंत्रालय से अनुरोध किया कि देश में कुश्ती गतिविधियां फिर शुरू कराई जाएं क्योंकि पेरिस ओलंपिक में सात महीने ही रह गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ओलंपिक की तैयारियों को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है।
भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों के प्रदर्शन के बाद से देश में पिछले कई महीने से कुश्ती ठप पड़ी है। डब्ल्यूएफआई के नये पदाधिकारियों के चुनाव के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ क्योंकि खेल मंत्रालय ने संजय सिंह की अध्यक्षता वाली पैनल को निलंबित कर दिया जिसने राष्ट्रीय अंडर 15 और अंडर 20 चैम्पियनशिप का ऐलान करके अपने ही संविधान का उल्लंघन किया था।
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बजरंग ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा- पिछले कई महीने से कुश्ती गतिविधियां बंद पड़ी हैं। कोई राष्ट्रीय चैंपियनशिप या शिविर भी आयोजित नहीं किया गया। संजय सिंह के अध्यक्ष बनने पर अपना पद्मश्री सम्मान लौटाने वाले बजरंग ने कहा- सात महीने बाद ओलंपिक है लेकिन कोई गंभीरता से नहीं ले रहा। कुश्ती ने पिछले चार ओलंपिक में हमें लगातार पदक दिए हैं। मैं खेल मंत्रालय से अनुरोध करता हूं कि कुश्ती गतिविधियां जल्दी शुरू कराई जाये ताकि खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित रहे।