सुहास पुरुष एकल एसएल4 वर्ग के फाइनल में फ्रांस के लुकस माजुर से 9-21, 13-21 से हार गए। सुहास भले ही स्वर्ण पदक नहीं ला सके, लेकिन लगातार दूसरी बार पैरालंपिक में पदक जीतने में सफल रहे।
भारतीय पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी सुहास एलवाई ने पेरिस पैरालंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। 2007 बैच के आईएएस अधिकारी 41 वर्ष के सुहास पुरुष एकल एसएल4 वर्ग के फाइनल में फ्रांस के लुकस माजुर से 9-21, 13-21 से हार गए। सुहास भले ही स्वर्ण पदक नहीं ला सके, लेकिन लगातार दूसरी बार पैरालंपिक में पदक जीतने में सफल रहे। सुहास ने टोक्यो पैरालंपिक में भी रजत पदक जीता था। तीन साल पहले भी लुकस ने ही सुहास को हराया था।
विज्ञापन
भारत का पेरिस पैरालंपिक में यह कुल 12वां और बैडमिंटन में चौथा पदक है। सुहास से पहले नितेश कुमार ने एसएल3 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था, जबकि थुलासिमाथी मुरुगेसन और मनीषा रामदास ने महिला एकल एसयू5 वर्ग में क्रमशः रजत और कांस्य पदक अपने नाम किए थे। उन्होंने कहा, मिश्रित भाव आ रहे हैं। एक तरफ तो रजत जीता है लेकिन दूसरी तरफ स्वर्ण से चूक गए। मैं देशवासियों से माफी मांगना चाहता हूं।
सुहास यतिराज खेल के साथ पढाई में भी अव्वल रहे हैं। बाएं टखने में विकार के बावजूद उन्होंने कम्प्यूटर इंजीनियरिंग में डिग्री लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की परीक्षा उत्तीर्ण की। कोरोना महामारी के दौरान वह गौतम बुद्ध नगर के डीएम थे और इससे पहले प्रयागराज के डीएम भी रह चुके हैं। इस समय वह उत्तर प्रदेश सरकार में युवा कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल के सचिव और महानिदेशक हैं।
विज्ञापन
सुकांत पदक से चूके
सुकांत कदम के पास कांस्य जीतने का मौका था लेकिन वह पुरुष एकल एसएल 4 वर्ग में कांस्य पदक के प्लेऑफ मुकाबले में इंडोनिशया के तीसरी वरीयता प्राप्त फ्रेडी सेताइवान से 17-21, 18-21 से हार गए।