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कुश्ती: बिटिया अंशु ने पूरा किया पापा का सपना, खेलेंगी ओलंपिक में

Sat, 22 May 2021 07:23 AM IST
Jeet Kumar स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सात साल पहले कुश्ती शुरू करने वाली 19 वर्षीय मलिक खेलेंगी ओलंपिक में 
  • प्रशिक्षण शुरू करने के चार साल के अंदर अंशु ने राज्य और राष्ट्रीय खिताब जीते 
  • 2016 में एशियाई कैडेट चैंपियनशिप में रजत और फिर विश्व कैडेट चैंपियनशिप में जीता कांसा 
  •  2020 जनवरी में अपना पहला सीनियर टूर्नामेंट खेला। अब टोक्यो का टिकट कटाने वाली चार महिला पहलवानों में हैं शामिल 
  • 06 सीनियर स्तर के टूर्नामेंट में लिया है अब तक भाग पांच में जीते पदक। इसमें एशियन चैंपियनशिप का स्वर्ण भी है 
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पहलवान अंशु मलिक - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारतीय महिला पहलवान अंशु मलिक (57 किग्रा) ने कुश्ती शुरू करने के महज सात साल के अंदर ओलंपिक कोटा हासिल कर पिता धर्मवीर के उस सपने को पूरा किया है जिसे वह खुद पूरा नहीं कर पाए थे।

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अंशु जब 12 साल की थी तबदादी को कहा था कि वह पहलवान बनना चाहती है। छोटे भाई शुभम की तरह वह भी यहां के निदानी खेल स्कूल में इसका प्रशिक्षण लेना चाहती है। धर्मवीर को इसके बाद छह महीने में पता चल गया कि उनकी छोरी (बेटी) किसी भी छोरे (लड़के) से कम नहीं है। वह उनसे बेहतर है।

उन्होंने कहा,‘छह महीने के प्रशिक्षण के बाद उसने उन लड़कियों को हराना शुरू कर दिया, जो वहां तीन-चार साल से अभ्यास कर रही थीं। फिर मैंने अपना ध्यान बेटे से ज्यादा बेटी पर लगाया। उसमें अच्छा करने की ललक थी।’ अंशु से जब उनके शुरुआती दिनों में निदानी खेल स्कूल के प्रशिक्षण के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा,‘जो पापा ने बताया है वही सही है जी।’
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पढ़ाई में भी अव्वल : अंशु ने कहा,‘मैं शर्माती नहीं हूं। मैं मैट (अखाड़े) के बाहर भी खुलकर रहती हूं।’ अंशु पहलवानी के साथ पढ़ाई में भी अव्वल रही हैं। उन्होंने कहा वह शुरू से ही हर चीज में शीर्ष पर रहना चाहती है।

उन्होंने कहा,‘मैं हमेशा से वो पदक जीतना चाहती थी, पोडियम (शीर्ष स्थान) का अहसास लेना चाहती हूं। स्कूल में भी, मैं पहले स्थान पर आना चाहती थी।’ उन्होंने गर्व के साथ बताया कि सीनियर माध्यमिक स्तर (12वीं कक्षा) में उन्हें 82 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए है।

अंशु ने कहा, ‘मैं मानसिक रूप से बहुत मजबूत हूं। अगर कोई मेरे बारे में नकारात्मक टिप्पणी करता है या मुझसे कहता है कि मैं मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाऊंगी तो भी मैं परेशान नहीं होती। यह मुझे प्रभावित नहीं करता है। इसके साथ ही मेरे आस पास सकारात्मक लोग रहते हैं। हर कोई मुझमें यह विश्वास जगाता है कि मैं सब कुछ करने के योग्य हूं। मेरे आसपास कोई नकारात्मक सोच वाला नहीं है।’
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चाचा थे हरियाणा केसरी 
अंशु के पिता ने एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया था लेकिन चोट के कारण उनका कॅरिअर परवान नहीं चढ़ा। उनके चाचा पवन कुमार ‘हरियाणा केसरी’ थे।

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