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आओ चलें खेल की ओर, जब खेलेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया

Wed, 07 Feb 2018 08:01 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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खेलो इंडिया
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स्कूल का होम वर्क, आधुनिक जीवन शैली और स्मार्ट फोन पर बीत रहे बचपन में खेल कहीं गुम सा हो गया था, लेकिन खेलो इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत शायद इसे फिर से पटरी पर ला सकता है। आज के दौर में खेल का दायरा महज मनोरंजन और फिटनेस तक नहीं सीमित रहा अब इसमें सुनहरे करियर नजर आ रहे हैं।
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‘घर आजा परदेशी, तेरा देश बुलाए रे...’ यह लाइन तो आपको याद ही होगी। आज के समय में कुछ ऐसा ही खेल की दुनिया में है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह बेहतर करियर का क्षेत्र बनकर उभर रहा है। ऊपर से केंद्र सरकार ने देश के युवा खिलाड़ियों की मदद के लिए चारों ओर से दरवाजे खोल दिए हैं। यह हाल ही में शुरू किए गए ‘खेलो इंडिया स्कूल गेम्स’ कार्यक्रम और आम बजट में धन की बरसा से स्पष्ट होता है। इसके अलावा सरकार खेल क्षेत्र में विकास को लेकर किस कदर उत्सुक है इसकी बानगी देश के खिलाड़ियों की हर उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं है! यानी अब खूब खेलेगा भारत और बुलंदियों के आसमान को छूएगा।

अब तक गरीब और बेहतर अवसर की कमी की वजह से देश के युवा खेल क्षेत्र में करियर बनाने से डरते थे, लेकिन अब खेलो इंडिया ने दिल्ली की झुग्गी से निकले उभरते स्प्रिंटर निसार अहमद को पंख देकर इन बेड़ियों को तोड़ दिया है। सरकार ने इस बार के बजट में खेल मद में 520.09 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। वहीं साई (स्पोर्ट्स ऑथारिटी ऑफ इंडिया) का बजट 66 करोड़ रुपये कम करके खेलो इंडिया पर पूरा जोर दिया। इस मद में दी जाने वाली रकम कुल बजट 23.67 फीसदी है।
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सरकार की पहल से इतर दुनियाभर में हो रहे लीग टूर्नामेंट युवा खिलाड़ियों के लिए स्वर्णिम अवसर बनता जा रहा है। पहले अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय तथा अन्य बड़े खेल आयोजनों के लिए टीम का हिस्सा बनने के लिए युवा खिलाड़ियों को कम अवसर मिल पाते थे। इसलिए वे खुद को बेहतर साबित नहीं कर पाते थे। लेकिन लीग जैसे खेल आयोजनों में न केवल खासी कमाई हो जा रही है, बल्कि खिलाड़ियों को अपना प्रदर्शन दिखाने और अनुभव लेने का एक प्लेटफार्म भी उपलब्ध करा रहा है।

लीग ही कर देगी माला-माल

खेलो इंडिया - फोटो : File
‘लीग’ यानी जहां पैसा है, ग्लैमर, कॉरपोरेट जगत के बड़े-बड़े नाम हैं और क्या...मनोरंजन है, जो दर्शकों की समां को बांधे रखता है। शायद यही वजह है कि आज के दौर में लीग टूर्नामेंटों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। अब तो इतनी लीग हो गई हैं जिन्हें उंगलियों पर गिनना शायद मुमकिन नहीं है। इन्हें टीवी दर्शकों ने लीग फॉर्मेट वाले टूर्नामेंटों को हाथों-हाथ लिया है। दुनियाभर की लीग टूर्नामेंट के चाहने वालों खूब बैठता है। अप्रैल माह में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का 11वां सत्र शुरू होने वाला है यानी दे दनादन क्रिकेट उत्सव करीब दो महीने तक चलेगा जिसका खुमार खेल प्रेमियों के बीच देखने को मिलेगा। 

इस आयोजन के दौरान लोगों पर सवार मैच देखने का पागलपन इसकी अहमियत का सबूत है। इस तरह की कई लीगों का दुनियाभर में किया जाता। ये टूर्नामेंट मनोरंजन का जरिया होने के साथ-साथ कमाई का भी बड़ा साधन है, पैसों की वर्षा कैसे होती है इसकी ताजी बानगी हाल ही में हुई आईपीएल की नीलामी में देखने को मिली। उल्लेखनीय है कि पहले नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल, अमेरिका, 1920), मेजर लीग बेसबॉल (एमएलबी, 1903), नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन (एनबीए, 1946), नेशनल हॉकी लीग (एनएचएल, आईस हॉकी, 1917), कनाडाई फुटबॉल लीग (सीएफएल, 1958) और मेजर लीग सोकर (एमएलएस, 1996) जैसे गिनीचुनी लीग हुआ करती थीं। लेकिन अब इसका खुमार दुनिया के हर प्रमुख खेलों पर चढ़ा हुआ है। 

क्रिकेट और टेनिस से लेकर कबड्डी तक इसके रंग में रंगे हुए हैं। ऐसे में भारत में होने वाली आईपीएल तेजी से उभर रही है। टीम मालिकों से सजी टीमें स्टेडियम तक दर्शकों को खींच पाने में सफल रहीं हैं। इसके साथ ही टूर्नामेंटों को टीवी पर भी बड़ी संख्या में दर्शक मिले। इस आयोजन के दौरान सट्टेबाजी का अंबार रहता है। किसी खेल आयोजन की सफलता पैमाना को उसे देखने के लिए जुटे दर्शकों की संख्या होती है। दुनियाभर में होने वाली लीग टूर्नामेंटों में दर्शकों की स्टेडियम या टेलीविजन सेट के सामने उपस्थिति ने इन्हें चर्चित बना दिया है।

इंडियन प्रीमियर लीग

आईपीएल 2018
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि क्रिकेट प्रेमियों पर इसका रंग जनवरी से ही देखने को मिलता है। यह 2008 में आरंभ हुआ। इस रोचक टूर्नामेंट में आठ टीमें खेलती हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा हाईप्रोफाइल क्रिकेट आयोजन है। आईपीएल तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके दर्शकों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। 2017 में दर्शकों की संख्या में 22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च काउंसिल के मुताबिक, आईपीएल के 10वें सीजन में दर्शकों की संख्या 1.25 अरब थी, जबकि नौवें सीजन में 1.02 अरब थी। 

साल 2017 के सीजन में इसकी कमाई का लक्ष्य 1300 करोड़ रुपये रखा गया था, लेकिन 1430 करोड़ रुपये सिर्फ विज्ञापन से ही मिले जो साल 2016 की कमाई से 230 करोड़ ज्यादा रहा। स्टार स्पोर्ट्स (16,347.5 करोड़ का मीडिया राइट्स) और विवो (टाइटल स्पॉन्सरशिप) के साथ ऐतिहासिक समझौता करके क्रिकेट की दुनिया में बड़ी लीग बनकर उभरी है। साथ ही इसमें खिलाड़ियों का भी जैकपॉट लगता है। 

आईपीएल की नीलामी के दौरान दुनियाभर के क्रिकेटरों की बोली 20 लाख से लेकर 14-15 करोड़ रुपये तक लगाई जाती है। आईपीएल की तर्ज पर ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट द्वारा 2011 में शुरू की गई बिग बैस लीग भी काफी चर्चित टी-20 टूर्नामेंट है। इसमें कुल आठ टीमें हिस्सा लेती हैं, जिसमें दुनिया भर के क्रिकेटर खेलते हैं।

इंटरनेशनल प्रीमियर टेनिस लीग

इंटरनेशनल प्रीमियर टेनिस लीग
साल 2013 में शुरू हुई इंटरनेशनल प्रीमियर टेनिस लीग (आईपीटीएल) में दुनिया के लगभग सभी शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। आईपीटीएल ने रोजर फेडरर, नोवाक जोकोविच जैसे सर्वोच्च खिलाड़ियों का भारत में पदार्पण करवाया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2014-15 में आईपीटीएल ने रोजर फेडरर और राफेल नदाल को करीब 25 करोड़ रुपये भुगतान किए गए थे। इससे लीग से देश के युवा खिलाड़ियों को फायदा हुआ। इसके जरिये देश के युवा खिलाड़ी को बेहतर मौका मिलता है।

चैंपियंस टेनिस लीग लीग फॉर्मेट वाले टूर्नामेंट के दौर में चैंपियंस टेनिस लीग को असफलता हाथ लगी। पूर्व दिग्गज खिलाड़ी विजय अमृतराज की पहल पर शुरू हुई यह लीग लोकप्रियता के मामले में पीछे छूट गई।

प्रो कबड्डी लीग

प्रो कब्बडी
जिस तरह से क्त्रिस्केट अंग्रेजों का परंपरागत खेल माना जाता है उसी तरह कबड्डी में भारत विश्व गुरु है। इस खेल में भारत का झंडा बुलंद होना लाजिमी है। एशियाई खेलों में कबड्डी का पदार्पण 1990 में हुआ। पहला कबड्डी विश्व कप 2004 में खेला गया। इन दोनों वैश्विक टूर्नामेंटों में भारत विजेता रहा है। ऐसे में कबड्डी के क्षेत्र में लीग टूर्नामेंट के न होने की कल्पना बेमानी है।

रत में कबड्डी दो लीग होती हैं। प्रो-कबड्डी लीग और विश्व कबड्डी लीग। दोनों टूर्नामेंट को दुनिया भर से 1.8 करोड़ टीवी दर्शक भी मिले। पीकेएल में 12 टीमें भिड़ती हैं। महज चार साल के इस टूर्नामेंट की लोकप्रियता पानी की तरह बढ़ रही है।

46.99 करोड़ रुपये एक टीम पर खर्च किए जाते हैं। पांचवें सीजन के लिए विवो के साथ पांच साल के लिए 300 करोड़ रुपये की स्पॉन्सरशिप की डील हुई है यानी 60 करोड़ रुपये प्रति साल। इसके अलावा और भी कई डील हुई हैं। इसके अनुसार पांचवें सीजन में इस लीग की कमाई 120 करोड़ रुपये की है।

इंडियन बैडमिंटन लीग
इंडियन बैडमिंटन लीग (आईबीएल) टूर्नामेंट को खेल प्रेमियों का भरपूर समर्थन मिलता है। देश की युवा खेल प्रतिभाओं को विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने, अपने प्रदर्शन में सुधार और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच भी प्रदान करता है। हालांकि कमाई के मामले में इसे घाटा लगता रहा है।  

प्रीमियर बैडमिंटन लीग वैश्विक शटल प्लेटफार्म है। इसमें पीवी सिंधू, साइना नेहवाल, श्रीकांत समेत दुनिया के दिग्गज खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इस लीग की नींव साल 2013 में बड़ी थी। हालांकि कुछ खास कमाई नहीं कर पाती है। दूसरे सीजन में इसकी कमाई 20 करोड़ रुपये से कम थी। इसमें आठ टीमें हिस्सा लेती हैं। इसमें खिलाड़ियों की नीलामी के दौरान 75 लाख तक बोली लगाई जाती है।

ला लीगा

ला लीगा
ला लीगा लीग दुनिया की सफल लीगों में से एक है। इसकी स्थापना 1929 में की गई थी। इसमें 20 टीमें हिस्सा लेती हैं। यह यूरोप में पहले से प्रतिष्ठित है। स्पेन में होने वाली यह लीग यूरोप में पिछले पांच सालों से शीर्ष स्थान पर है। इसमें लियोनल मेसी जैसे दुनिया के दिग्गज फुटबॉलर हिस्सा लेते हैं। इस प्रतियोगिता का खिताब रीयल मैड्रिड टीम सबसे अधिक बार (33) अपने नाम कर चुकी है।

इस लीग की टीम बार्सिलोना के खिलाड़ी लियोनल मेसी की सबसे अधिक कमाई (4.52 करोड़ रुपये) है। रियल मैड्रिड के फुटबालर क्त्रिस्स्टियानो रोनाल्डो की 3.16 करोड़ और जेरेथ बेले की 2.71 करोड़ रुपये कमाई है।
 

नेशनल फुटबॉल लीग

नेशनल फुटबॉल लीग
नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल) खासा दर्शकों वाला आयोजन है। इसकी शुरुआत 1920 में की गई थी। अमेरिका में होने वाली 97 साल पुरानी इस फुटबॉल लीग में कुल 32 टीमों के बीच मुकाबले होते हैं। इसकी सालाना कमाई करीब 1040 अरब रुपये है।

वहीं, आस्ट्रेलियन फुटबॉल लीग (एफएल) की शुरुआत 1897 में ‘विक्टोरियन फुटबॉल लीग’ किया गया था। इसमें 18 टीमें हिस्सा लेती हैं। इसका आयोजन हर साल क्रिसमस त्योहार के बाद होता है। इसमें हिस्सा लेने वाले प्रत्येक क्लब 6 मैच खेलते हैं। डैनी अमेनडोला, ड्लोन लेवल्स, जय अयल कॉरेय क्लिमेंट जैसे खिलाड़ी खेलते हैं। इनकी सैलरी लाखों-करोड़ों में होती है।

इंडियन सुपर लीग

इंडियन सुपर लीग
फुटबॉल की दुनिया में भारत भले ही अभी पीछे है, लेकिन विश्व के दिग्गज फुटबॉलर भी देश को खेल का बड़ा बाजार मानते हैं। यहां होने वाली इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) काफी सुर्खियां बटोरती है। इसकी शुरुआत 2013 में की गई थी। इसके जरिये भारत फुटबॉल में वैश्विक शक्ति बनकर उभर रहा है। संभवत 2016 में भारतीय टीम को फीफा विश्वकप का टिकट मिल जाए। इसमें कुल 10 क्लबों के बीच मुकाबला होता है। चौथे सीजन में इसने 200 करोड़ रुपये की कमाई की थी।

मेजर लीग बेसबॉल

मेजर लीग बेसबॉल
मेजर लीग बेसबॉल (एमएलबी) अमेरिका की मशहूर लीग में शामिल है। एमएलबी की शुरुआत 1903 नें की गई। इसमें कुल 30 टीमें हिस्सा लेती हैं, जिसमें 29 अमेरिका की और एक कनाडा की है। पिछले साल इसकी कमाई करीब 799 अरब रुपये। इसमें 1200 खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। मेजर लीग के हर सीजन में 162 मुकाबले होते हैं। यह साल 1903 से आयोजित होती आ रही है। शोहेई ओटानी, रोनाल्ड अक्यूना, व्लादिमीर गुएरेरो और एलोए जिमेनज जैसे शीर्ष रैंक वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इस अमेरिकी लीग के खिलाड़ियों की कमाई अरबों में होती है। 

नेशनल हॉकी लीग

नेशनल हॉकी लीग
नेशनल हॉकी लीग अमेरिका और कनाडा के आईस हॉकी क्लब इस लीग में हिस्सा लेते हैं। इसकी शुरुआत नवंबर, 1917 में हुई थी। साल 2016-17 में 296 अरब रुपये की कमाई की थी। इस टूर्नामेंट में 31 टीमें हिस्सा लेती हैं। साल 2017 में इस लीग की कमाई 284 अरब रुपये हुई थी।  

इस लीग में जानथन टोवज और पैट्रिक केन की सबसे ज्यादा सैलरी है। उनकी वार्षिक कमाई करीब 77 करोड़ रुपये होती है। वहीं सिडनी क्त्रसेसबी की 70 करोड़ और एलेक्सजेंडर ओवेचकिन की 64 करोड़ रुपये है। 

वहीं, भारत में होने वाली हॉकी इंडिया लीग की घोषणा साल 2013 में हुई थी। इस टूर्नामेंट में छह टीमें हिस्सा लेती हैं। इसे कोल इंडिया हॉकी इंडिया लीग के नाम से भी जाना जाता है। इसमें विजेता टीम को तीन करोड़ और उपविजेता 1.5 करोड़ रुपये की राशि दी जाती है। हालांकि इस बार यह टूर्नामेंट नहीं होगा। 
 
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नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन

नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन
नेशनल बास्केबॉल एसोसिएशन लीग काफी खर्चिला स्पोर्ट्स लीग है जो आईबीएफ का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी शुरुआत 6 जुन, 1946 को बास्केटबॉल एसोसिएशन लीग नाम से न्यूयार्क सिटी से की गई थी। इसें कुल 30 टीमें हिस्सा लेती हैं। इस प्रतियोगिता में एंथोनी डेविस, क्रिस पाउल और रस्सेल वेस्टब्रूक जैसे दिग्गज खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इसमें खिलाड़ी सलाना सैलरी 20 लाख से लेकर 2.20 अरब रुपये होती है। इस मशहूर लीग की कमाई 55.22 अरब रुपये है।
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