कहते हैं इतिहास अपने को दोहराता है। बीजिंग ओलंपिक में जब भारत के सुशील कुमार ने देश को 56 साल बाद पदक दिलाया था तब वह भी रेपचेज में ही जीते थे। 2012 में लंदन ओलंपिक में योगेश्वर दत्त ने भी रेपचेज में ही पदक जीता था। साक्षी मलिका ने भी 2016 रियो ओलंपिक में रेपचेज राउंड में जीतकर ही कांस्य पदक जीता था और अब महिला पहलवानी की नई क्रांति का बिगुल विनेश फोगाट ने बजाया।
विनेश ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप की शुरुआत तो जबरदस्त की थी, लेकिन जापान की मायु मुकैदा से हारकर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में खिताब की दौड़ से बाहर हो गई, लेकिन उन्हें भाग्य का साथ तब मिला जब मायु मुकैदा फाइनल में पहुंच गईं। इसी के साथ विनेश को रेपचेप में एक मौका और मिला।
फिर रेपेचेज के पहले दौर में उन्होंने यूक्रेन की यूलिया खालवाद्जी को आसानी से 5-0 से पराजित किया। अमेरिका की सारा एन हिल्डेब्रांट ने कम से कम पांच बार विनेश के दाएं पैर को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन भारतीय पहलवान ने बेहतरीन रक्षात्मक प्रदर्शन करते हुए उसे फायदा नहीं उठाने दिया और 53 किग्रा में रेपेचेज के दूसरे दौर में 8-2 से जीत हासिल की।
तीसरे और निर्णायक राउंड में विनेश के सामने ग्रीस की मारिया प्रेवोलाराकी थीं। घायल अवस्था में मैट पर उतरी मारिया के चेहरे से लगातार खून निकल रहा था, बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी, लेकिन उनकी कमजोरी का फायदा उठाते हुए विनेश ने न सिर्फ जीत हासिल की बल्कि 53 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल भी हासिल किया। इस जीत के साथ ही विनेश फोगाट टोक्यो ओलंपिक 2020 में क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय पहलवान भी बन गईं।