शाकाहार के दम पर सुशील कुमार जैसे पहलवानों के ताल ठोकनें के उदाहरण मौजूद हैं, लेकिन एथलेटिक्स की थ्रो इवेंट में शाकाहारी एथलीटों की कल्पना मुश्किल है। थ्रोअरों को भुजाओं और शरीर में ताकत लाने के लिए देर-सवेर नॉनवेज शुरू ही करना पड़ता है, लेकिन हाल ही में 66.59 मीटर के राष्ट्रीय कीर्तिमान के साथ डिस्कस फेंक कर पूरी दुनिया की नजरों में छाने वाली कमलप्रीत कौर के साथ ऐसा नहीं है। उनके सामने जब नॉन वेज शुरू करने की बात रखी गई तो उन्होंने साफ कर दिया कि वह डिस्कस थ्रो छोड़ सकती हैं, लेकिन नॉन वेज को हाथ नहीं लगाएंगी। इसी शाकाहार के दम पर उन्होंने ओलंपिक के फाइनल में जगह बना डाली।