फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अबकी बार है मौका: 1988 से किसी बुरे सपने की तरह रहा है ओलंपिक में टेबल टेनिस का प्रदर्शन

Wed, 14 Jul 2021 07:47 AM IST
Jeet Kumar स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • 1988 से किसी बुरे सपने की तरह रहा है ओलंपिक में टेबल टेनिस का प्रदर्शन
  • विश्व नंबर पांच कोरियाई जोड़ी को हराकर शरत-मनिका ने हासिल किया था टोक्यो का टिकट
  • इससे पहले सिर्फ दो ओलंपिक में चार टेबल टेनिस खिलाड़ी खेले थे
विज्ञापन
टेबल टेनिस - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय टेबल टेनिस खिलाडिय़ों के लिए ओलंपिक किसी बुरे सपने की तरह रहे हैं। आज तक कोई भी भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी खास क्या आम प्रदर्शन को अंजाम नहीं दे पाया है, लेकिन इस बार अचिंत्य शरत कमल और मनिका बत्रा की जोड़ी मिश्रित युगल में पदक की दावेदार मानी जा रही है।

विज्ञापन


इस जोड़ी ने जिस तरह विश्व नंबर पांच कोरियाई जोड़ी को ओलंपिक क्वालिफायर के फाइनल में हराकर टोक्यो का टिकट हासिल किया उसके बाद से सारी निगाहें इन पर आ टिकी हैं। हालांकि यह जोड़ी बिना कोई टूर्नामेंट खेले ओलंपिक में खेलने जा रही है।

एशियाई खेलों ने जगाई ओलंपिक पदक की आस
1988 के सियोल ओलंपिक में पहली बार टेबल टेनिस शामिल किया गया। तब से अब तक हमेशा भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी ओलंपिक का हिस्सा रहे हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन महज भागीदारी तक ही निर्भर रहा।
विज्ञापन


गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्णिम प्रदर्शन और जकार्ता एशियाई में खेलों में जीते गए कांस्य पदक ने शरत कमल, मनिका, जी सथियन और सुतीर्था मुखर्जी के अंदर कूट-कूटकर विश्वास भर दिया है। शरत तो यहां तक कह चुके हैं कि जब भारतीय एशियाई खेल में पदक जीत सकते हैं तो ओलंपिक में भी जीता जा सकता है। शरत कहते हैं कि एशियाई खेलों के पदक ने ही उनके अंदर ओलंपिक के पदक का सपना जगाया है।

सिर्फ 20 दिन साथ तैयारियां की हैं
शरत और मनिका को एक साथ ओलंपिक के लिए तैयारियों का ज्यादा मौका नहीं मिला है। ओलंपिक क्वालिफाई करने के बाद 17 जून से सोनीपत में लगाए गए शिविर में दोनों को एक साथ बुलाया गया।

यहां उन्होंने सानिल शेट्टी, मानव ठक्कर जैसे जोड़ीदारों के साथ मिलकर तैयारियां कीं। लेकिन ओलंपिक क्वालिफाई करने के बाद दोनों एक भी टूर्नामेंट नहीं खेले हैं। बावजूद इसके दोनों में जबरदस्त तालमेल है। टोक्यो में सिर्फ तीन जीत उन्हें इतिहास रचने का मौका देगी।

कोरोना ने तैयारियों को सिरे नहीं चढने दिया
मैं यह मानता हूं कि मनिका और शरत की जोड़ी ने जिस तरह का खेल ओलंपिक क्वालिफायर में दिखाया है उससे उनके पदक जीतने के अवसर हैं। मैं 1992 के बार्सिलोना ओलंपिक से भारतीय टीम के साथ हूं। ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ी खास नहीं कर पाए हैं।

इस बार मुझे इस जोड़ी से उम्मीद है, बावजूद इसके फेडरेशन की योजनाओं के अनुरूप खिलाडिय़ों की तैयारियां नहीं हो पाई हैं। उन्हें यूरोप और चीन में तैयारियों के लिए भेजना था, लेकिन कोरोना के चलते सब गड़बड़ हो गया। सिंगल्स में भी शरत, सथियन, मनिका पिछली बुरी यादों को पीछे छोडने की कूवत रखते हैं। धनराज चौधरी-सीईओ टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें