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खेल मंत्रालय का बड़ा फैसला, भारतीय कोचों के लिए दो लाख रूपये वेतन की ऊपरी सीमा हटेगी

Sat, 04 Jul 2020 03:05 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोचों के पारिश्रमिक का निर्धारण पूर्व-एलीट वर्ग के एथलीट के प्रदर्शन और कोच के तौर पर उसकी सफलता पर अधारित होगा। खेल मंत्रालय 2028 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए कोविड-19 महमारी के खत्म होने के बाद जमीनी स्तर की प्रतिभा खोजना फिर से शुरू करेगा। 2028 तक ओलंपिक चैंपियन बनाने के उद्देश्य से देश में जूनियर एथलीटों के लिए टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) भी शुरू करेगी।
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किरेन रिजिजू - फोटो : Twitter
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विस्तार
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खेल मंत्रालय ने शनिवार को भारतीय कोचों द्वारा एलीट एथलीटों को प्रशिक्षण देने पर वेतन की ऊपरी सीमा दो लाख रुपये को हटाने की घोषणा की, ताकि वे बेहतर परिणाम देने के लिए प्रोत्साहित हों और पूर्व खिलाड़ियों को हाई परफोर्मेंस प्रशिक्षक बनने के लिए उत्साहित किया जा सके।

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मंत्रालय ने शुक्रवार को सभी विदेशी कोचों के अनुबंध को अगले साल 30 सितंबर तक बढ़ने का फैसला किया जिसके बाद यह घोषणा की गयी। इसके साथ ही ओलंपिक से तालमेल बैठाते हुए अब भारतीय और विदेशी कोच को चार साल के लिए चुनने का फैसला किया गया।

खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने यहां जारी बयान में कहा, 'कई भारतीय कोच बहुत अच्छे परिणाम दे रहे हैं और उन्हें कड़ी मेहनत के लिए पुरस्कृत करने की आवश्यकता है। सरकार देश भर से सर्वश्रेष्ठ कोचिंग प्रतिभाओं को आकर्षित करने की इच्छुक है। एलीट एथलीटों को प्रशिक्षित करने के लिए हम नहीं चाहते हैं कि कोच के ऊपरी वेतन की कोई सीमा कोई रूकावट बने।'
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मंत्रालय की विज्ञप्ति में कहा गया है कि पूर्व दिग्गज एथलीटों को खेल तंत्र में आकर्षित करने के लिए बढी हुई पारिश्रमिक और लंबी अनुबंध अवधि की पेशकश की जाएगी। इसका मकसद ओलंपिक सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए क्वालीफाई करने वाले खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए उनके अनुभव और कौशल का उपयोग करने है।

पहले से विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में काम करने वाले प्रख्यात कोचों को प्रतिनियुक्ति पर जुड़ने और चार साल के अनुबंध के साथ-साथ उच्च वेतन संरचना के लिए पात्र होने की अनुमति दी जाएगी।

मंत्रालय के बयान के मुताबिक, 'सभी नए कोच और मौजूदा कोच जिन्हें नया अनुबंध दिया गया है, वे राष्ट्रीय शिविर और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) में प्रशिक्षण प्रदान करेंगे जिनका चयन खेल मंत्रालय और राष्ट्रीय खेल संघों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।'

इस कदम का स्वागत करते हुए बैडमिंटन के राष्ट्रीय मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद ने कहा, 'यह लंबे समय से खेल बिरादरी की मांग रही है। मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं क्योंकि यह कई प्रतिभाशाली प्रशिक्षकों और पूर्व दिग्गज एथलीटों को इस पेशे में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करेगा।'

रिजिजू ने ‘फिट है तो हिट है फिट इंडिया’ वेबिनार के दौरान इस बारे में घोषणा की। इस वेबिनार में मानव संसाधन मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल, ओलिंपिक पदक विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु और भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री ने भी भाग लिया।

खेल मंत्री ने कहा, ‘यह हर भारतीय का सपना है और मैं इसे हकीकत में बदलना चाहता हूं। ओलिंपिक सबसे बड़ा खेल आयोजन है और जब पदक तालिका में भारत का नाम नहीं होता है तो काफी दुख होता है।’ उन्होंने कहा, ‘हमने अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की है, हमने बड़ा आधार बनाया है। फिलहाल टॉप्स की योजना ओलिंपिक में पदक की संभावना वाले सीनियर ऐथलीटों के लिए है, लेकिन हम जल्द ही जूनियर खिलाड़ियों के लिए भी टॉप्स योजना शुरू करेंगे।’

खेल मंत्री ने जूनियर एथलीट के लिए 'टॉप्स' भी शुरू करने की बात कही। 10 से 12 साल की प्रतिभा की पहचान कर उन्हें अपनाया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘हम उनकी हर जरूरत का ख्याल रखेंगे और 2028 ओलंपिक तक उन्हें पदक की संभावनाओं के रूप में तैयार करेंगे।’

उन्होंन कहा, ‘जब मैं खेल मंत्री बना था तो मैंने 2028 ओलंपिक में पदक तालिका में शीर्ष 10 में जगह बनाना लक्ष्य रखा था। मैं पूरे यकीन के साथ कह रहा हूं कि इसे हासिल किया जा सकता है।’ इस वेबिनार में रिजिजू ने भारत के फिट होने पर जोर दिया और कहा कि ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बहुत बड़ा योगदान दे रहा है।

उन्होंने कहा, ‘फिट इंडिय मूवमेंट सही मायनों में लोगों का अंदोलन बन गया है। इसका अंतिम मकसद भारत को फिट बनाना है।’ उन्होंने कहा, ‘यह सही तरीके से आगे बढ़ रहा है और 29 अगस्त को एक साल पूरा हो जाएगा। हमने इन एक वर्षों में काफी कुछ हासिल किया है।’

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