गौरतलब है कि मनिका के वकील सचिन दत्ता ने याचिका में कहा है कि सारे मानदंड़ों पर खरी उतरने के बावजूद सिर्फ नेशनल में भाग नहीं लेने के कारण बत्रा को दोहा में सितंबर-अक्टूबर में होने वाली एशियाई चैम्पियनशिप में खेलने का मौका नहीं दिया जा रहा। उन्होंने अदालत से इस नियम पर रोक लगाने की मांग की, ताकि वह नवंबर में एक अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग ले सकें।
उन्होंने कहा, 'नवंबर में एक और टूर्नामेंट है। इस नियम पर रोक लगनी चाहिए। इससे उसका कैरियर खत्म हो जाएगा।'
याचिका में एक और आरोप लगाया गया कि नेशनल कोच सौम्यदीप रॉय ने बत्रा पर एक मैच गंवाने का दबाव बनाया था, ताकि उनकी निजी प्रशिक्षु ओलंपिक 2020 के लिए क्वालीफाई कर सके। बत्रा ने महासंघ के प्रबंधन की जांच का निर्देश भी खेल मंत्रालय को देने की मांग की है।
हालांकि महासंघ ने तमाम आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि नेशनल कोच शिविर में मौजूद ही नहीं है। कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट और खेल रत्न पुरस्कार विजेता बत्रा ने आरोप लगाया कि महासंघ की चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और उनकी तरह खिलाड़ियों को निशाना बनाया जा रहा है जो खेलों और खिलाड़ियों के हितों के विपरीत है।