सबसे ज्यादा सुखियों में 22 बरस के सिमरनजीत सिंह यहां भारतीय टीम के लिए स्ट्राइकर और आक्रामक मिडफील्डर के रूप मे तीन शानदार गोल कर कर है। गुरदासपुर के चाहल कलां गांव के सिमरनजीत सिंह से जब अपने फुफेरे भाई गुरजंत सिंह को पीछे छोड़ इस विश्व कप में भारतीय टीम में जगह बनाने की बाबत पूछा तो हंसकर बोले, ‘सभी अच्छे हैं। गुरजंत को मुझसे पहले एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के लिए टीम में जगह मिली थी तो मुझे विश्व कप के लिए। हालांकि गुरजंत रिजर्व खिलाड़ी के रूप में अभी भी टीम के साथ यहां है। टीम में जगह के लिए इस प्रतिद्वंद्विता से बेहतर और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है। मुझे हॉकी विरासत में मिली है। मैं टीम में मिडफील्डर, स्ट्राइकर और लिंकमैन, कोच साहब (हरेन्द्र सिंह) को जरूरत के मुताबिक कहीं भी अपना बेस्ट करने को बेताब रहता हूं। दरअसल हरेन्द्र सर के हम इतने समय से बराबर खेल रहे हैं कि वे हमारी क्षमता और टीम की जरूरत के मुताबिक उसका बेहतरीन ढंग से इस्तेमाल करते हैं। मैं, आकाशदीप और ललित उपाध्याय में टीम की जरूरत के मुताबिक लिंकमैन और फॉरवर्ड के रूप में कहीं भी खेलने के लिए जेहनी तौर पर तैयार हैं। हरेन्द्र ने हमें इसके लिए तैयार किया है और मैं हॉकी में बतौर सलाह हरेन्द्र सर की ही मानता हूं। मुझे हॉकी विरासत में मिली है। मैंने शुरूआती हॉकी कोच रणजीत सिंह से सिखी। मेरे पिता इकबाल सिंह, चाचा रछपाल सिंह और बुआ के लिए गुरजंत सिंह हॉकी खेलते हैं। मेरे आदर्श ऑस्ट्रेलिया के जैमी डायर और भारत के पूर्व सेंटर हाफ सरदार सिंह रहे हैं। मैं मध्यपंक्ति में अपने कप्तान मनप्रीत सिंह के सेंटर हाफ के रूप में खेल से खासा प्रभावित हूं। यहां अब तक अपने और टीम के प्रदर्शन से अच्छे नतीजे, काफी आगे तक जाने की उ मीद है..... फाइनल तक । फिर भी हम एक समय केवल एक मैच की बाबत सोच रहे हैं। हम फिलहाल कनाडा के खिलाफ अगले मैच में जीत और ज्यादा से ज्यादा गोल करने पर निगाह करने पर है। हमारे कोच हरेन्द्र सिंह ने हमें इस तरह तैयार किया है कि हम जरूरत के मुताबिक किसी भी पॉजिशन पर खेल किसी स्थिति से निबट सकते हैं। जहां तक रिक चार्ल्सवर्थ ने गेंद के पीछे उसी तरह स्टिक नीचे रखने कर गेंद को कब्जे में लेने तारीफ की है जिस तरह क्रिकेट में धोनी अपना बल्ला लाते हैं तो मैं इससे अभिभूत हूं।’
20 बरस के हार्दिक सिंह को हॉकी विरासत से मिली है। उनके मामा जुगराज सिंह भारत के लिए खेल चुके हैं और उनकी ताई राजबीर कौर भी भारत की धुरंधर हॉकी खिलाड़ी रह चुकी हैं। सच यह है वह अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी के खिलाड़ी है जो भारत के लिए खेल रहे हैं। 20 बरस के हार्दिक सिंह यहां बतौर लिंकमैन चीफ कोच हरेन्द्र सिंह की इस विश्व कप में तुरुप के इक्के साबित हो रह हैं।
हार्दिक सिंह ने कहा, ‘मेरे पिता वरिंदर प्रीत, मामा जुगराज, ताई राजबीर कौर और दादा पीएस राय सभी हॉकी खेले। मेरे पिता वरिंदर प्रीत भी हॉकी खेले हैं। मुझे शुरू से ही हॉकी खेलने और सीखने का माहौल अपने गांव खुसरोपुर में मिला। मैं भारत के लिए खेला तो जुगराज सिंह और राजबीर कौर ने मुझे मेरा खेल बेहतर करने में मदद की। जब 2016 में मुझे जूनियर हॉकी विश्व कप के लिए भारतीय टीम में जगह नहीं मिली तो मैं करीब एक बरस घर पर रहा। मैंने खुद से कहा कि जूनियर विश्व कप न सही मैं सीनियर विश्व कप में भारत के लिए जगह बना सकता हूं। घरेलू हॉकी में अपना खेल करने में जुटा रहा। मैं 2016 में हरेन्द्र सर के मार्गदर्शन में खेल रहा हूं। मैं टीम के लिए लिंकमैन के रूप में और मिडफील्डर के रूप में जहां भी जरूरत हो खेलने को तैयार हूं। हमारे कोच हरेन्द्र सर की सबसे अच्छी बात यह है कि वह हम सभी को बिना दबाव के सहज होकर अपना सर्वश्रेष्ठ खेलने को प्रेरित करते हैं । हरेन्द्र सर का जोर बेसिक्स पर काबिज रह कर सर्वश्रेष्ठ खेल पर रहता है। हमारी कोशिश कनाडा के खिलाफ मैच ज्यादा से ज्यादा गोल से जीतने की होगी। हम जब मैच के बीच आराम होता तो हॉकी की बजाय कुछ मौज मस्ती करते हैं। अपने मैचों के विडियो देख अपना खेल सुधारने और प्रतिद्वी टीम के विडियो देख खुद को उसी के मुताबिक तैयार करते हैं। अब यहां मैचों के बीच जो ब्रेक मिला उसमें हमारी टीम पुरी के समुद्र तट पर गई। मैं टीम में लगभग सभी के साथ खेल चुका हूं। कुछ मेरे साथ जूनियर टीम में थे ते वह अब सीनियर टीम में हैं। इससे हममें तालेमल बहुत अच्छा है। अब हमारे व्हाटसऐप ग्रुप का नाम ‘मिशन विश्व कप’ है। हमें पूरा भरोसा है कि हमारी टीम यहां विश्व कप के फाइनल में खेलेगी।
23 बरस के नीलकांत शर्मा मणिपुर के ओडिशा हॉकी विश्व कप में शिरकत करने वाली टीम की त्रिमूर्ति की अहम कड़ी हैं। बतौर ऑलराउंडर लिंकमैन धैर्य के साथ गोल के अभियान बना कर गेंद को बहुत चतुराई से आगे बढ़ाते हैं।
नीलकांत कहते हैं,‘मैं डिफेंस में कुछ उन्नीस था लेकिन कोच साहब (हरेन्द्र) सर ने मेरी हमले बोलने की क्षमता के कारण मुझे लिंकमैन और आक्रामक सेंटर हाफ में आजमाया। मुझे यह नया रोल रास आ रहा है। मैं जब जूनियर विश्व कप की टीम में था तब भी कोच हम सभी को अपनी बात खुल कर कहने और अपनी हॉकी का लुत्फ उठाने की नसीहत देते थे। अब सीनियर टीम के इस विश्व कप में सभी साथी पूरे तालमेल से खेल रहे हैं। मैं अपने चाचा नौरेन को हॉकी खेलत देख हॉकी खेलनी शुरू की। मेरे पहले हॉकी कोच कोथाहालुप थ। हरेन्द्र सर हिंदी में समझाते हैं और इसीलिए उनकी सब बात समझ में आती हे। मैं मणिपुर के छोटे से सैंदी कुम गांव से हूं। मेरी बतौर लिंकमैन हार्दिक, सिमरनजीत अैर आकाशदीप के साथ जुगलबंदी खूब जम रही है। हमारी टीम अब दबाव में बेहतर खेल रही है। यहां खेल रही इस विश्व कप की टीम में हमारे उपकप्तान चिंगलेनसाना सिंह और कोथाजीत सिंह भी मणिपुर के हैं। ये दोनों, हमारे कप्तान और कोच बराबर यही सलाह देते हैं कि मैदान पर उतर कर खुद पर भरोसा कर अपना सर्वश्रेष्ठ करने पर ध्यान लगाउं। सीनियर हो या जूनियर किसी भी टीम में सभी के साथ लय ताल बैठाने में खासी दिक्कत आती है। मैं मैदान पर पूरी शिद्दत से अपन सर्वश्रेष्ठ करने पर ध्यान लगा रहा हूं। हमारी टीम सधे कदमों से आगे बढ़ रही है और पूरा भरोसा है कि हमारी टीम फाइनल खेलेगी।