फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सबसे पुराना सम्मान है अर्जुन अवॉर्ड, जानिए राष्ट्रीय खेल पुरस्कार का पूरा इतिहास

Sat, 29 Aug 2020 02:59 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
राष्ट्रीय खेल पुरस्कार - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

आज मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन यानि खेल दिवस के मौके पर राष्ट्रीय खेल पुरस्कार बांटे गए। कोविड-19 के कड़े प्रोटोकॉल के कारण पुरस्कार के 44 साल के इतिहास में पहली बार हुआ जब विजेता, मेहमान और गणमान्य लोग दरबार हॉल में इकट्ठा नहीं हो सके। पुरस्कार वितरण ऑनलाइन हुआ। खेल रत्न के लिए इस बार सर्वाधिक पांच लोगों को चुना गया। 

विज्ञापन


देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न, अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार और मेजर ध्यानचंद पुरस्कार का इतिहास पुराना है। आपको बचाते हैं इन पुरस्कारों की शुरुआत कब हुई थी और कितनी राशि पुरस्कार के रूप में विजेता खिलाड़ियों को प्रदान की जाती है।

राजीव गांधी खेल रत्न

राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड - फोटो : social Media
राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी की स्मृति में दिया जाता है। यह भारत में सर्वोच्च स्थान प्राप्त राष्ट्रीय खेल पुरस्कार है। 'खेल रत्न' का अर्थ है, यह पुरस्कार उन खिलाड़ियों के लिए प्रस्तुत किया जाता है, जिन्होंने खेल के क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन किया है। ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद को वर्ष 1991-92 में पहली बार खेल रत्न से सम्मानित किया गया था। इस पुरस्कार में एक पदक, एक प्रशस्ति पत्र और साढ़े सात लाख रुपये दिए जाते थे, जिसे इस बार से बढ़ाकर 25 लाख रूपये कर दिया गया।

अर्जुन पुरस्कार

भारत में सबसे पुराना राष्ट्रीय खेल पुरस्कार अर्जुन पुरस्कार है। वर्ष 1961 में इसकी शुरुआत हुई थी। खेल में अपनी उत्कृष्टता के लिए खेल हस्तियों को समर्पित यह पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न के बाद दूसरा सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। यह पुरस्कार लगातार चार वर्ष तक बेहतरीन प्रदर्शन, लीडरशिप क्वालिटी, खेल भावना और अनुशासन के लिए दिया जाता है। पुरस्कार के रूप में पहले पांच लाख रुपये की राशि दी जाती थी, जो इस बार से 15 लाख रूपये हुई। इसके अलावा अर्जुन की कांस्य प्रतिमा और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। साल 1961 में इस पुरस्कार को कुल छह खिलाड़ियों को दिया गया था। जिसमें सलीम दुरानी इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले पहले क्रिकेटर थे।

द्रोणाचार्य पुरस्कार

- फोटो : social Media
वर्ष 1985 में शुरू हुआ द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रतिष्ठित प्रशिक्षकों को दिया जाता है, जिनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में देश का मान बढ़ाते हैं और मेडल जीतकर लाते हैं। इस पुरस्कार से खिलाड़ियों के कोच को सम्मानित किया जाता है। द्रोणाचार्य पुरस्कार के तहत गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा, प्रमाणपत्र, पारंपरिक पोशाक दिया जाता है। नए घोषणा के तहत इस बार द्रोणाचार्य विजेताओ (आजीवन) की इनामी राशि पांच से 15 लाख रूपये कर दी गई तो वहीं नियमित द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं को 10 लाख रूपये प्रदान दिए गए जो पहले पांच लाख रूपये होते थे। द्रोणाचार्य पुरस्कार केवल उन्हीं कोचों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने लगातार तीन वर्षों तक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर शानदार काम किया हो।
विज्ञापन

- फोटो : social Media

यह पुरस्कार खेल-कूद में आजीवन उपलब्धि के लिए वर्ष 2002 में शुरू किया गया सर्वोच्च पुरस्कार है। यह पुरस्कार महान भारतीय हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के नाम पर है। यह पुरस्कार प्राप्त करने वालों को एक प्रतिमा, प्रमाणपत्र, पारंपरिक पोशाक और ध्यानचंद्र पुरस्कार विजेताओं को 10 लाख रूपये दिए जाते हैं (2019 तक पांच लाख)। इस पुरस्कार से प्रत्येक वर्ष अधिक से अधिक तीन खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाता है। ध्यानचंद पुरस्कार सबसे पहले अपर्णा घोष, अशोक दीवान और शाहराज बिराजजदार को प्रदान किया गया था।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें