Deepak Kabra at the 2020 Tokyo Olympics
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टोक्यो ओलंपिक में पहली बार जिम्नास्टिक जज बनकर इतिहास बनाने वाले दीपक काबरा को चीन पर ट्वीट करना बुरी तरह भारी पड़ गया। चीनियों ने भारतीय जज की ओर से दो साल पहले किए गए ट्वीट को आधार बना उन पर चीनी जिम्नास्ट के खिलाफ पक्षपात के आरोप मढ़ दिए। जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय जिम्नास्टिक फेडरेशन (एफआईजी) ने बीच ओलंपिक में उन्हें न सिर्फ लिखित चेतावनी जारी की बल्कि उन्हें फाइनल की जजिंग से हटाकर देश को शर्मसार किया।
हालांकि अगले ही दिन जज ने इस फैसले के खिलाफ अपील की। इसके बाद मामले को एफआईजी के एथिक्स फाउंडेशन के पास भेज दिया गया। मामला अभी भी यहां लंबित पड़ा है।
चीनी जिम्नास्ट के हारने पर छिड़ा विवाद
28 जुलाई को आलराउंड जिम्नास्टिक में जापानी ने चीनी जिम्नास्ट को पछाड़ स्वर्ण जीत लिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर चीनियों ने जजों पर पक्षपात के आरोप मढ़ डाले। इन्हीं आरोपों में उन्होंने काबरा के अक्तूबर 2019 में किए गए ट्वीट को निकाल लिया। जिसमें उन्होंने लिखा था कि चीन सारे स्वर्ण पदक जीत रहा है। चीन को पूर्ण सफाए से रोकने के लिए किसी न किसी को आगे आना चाहिए। इस ट्वीट को आधार बना चीन ने एफआईजी से शिकायत भी की। इसके बाद एफआईजी ने काबरा को निशाना बना जजिंग से रोक दिया। यही नहीं आगे के लिए टोक्यो में रुकने का होटल खर्च और हवाई यात्रा के पैसे भी उनसे मांगे गए।
काबरा ने फैसले को दी चुनौती
हालांकि अगले ही दिन काबरा ने इस मामले पर अपील कर एफआईजी के फैसले के चुनौती दी। अपील में फैसले को गलत बताया गया। इसके बाद मामले को एथिक्स फाउंडेशन को भेज दिया गया। अपील के बाद काबरा जजिंग कर सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों के बाद खुद से अलग कर लिया।
दीपक काबरा ने अमर उजाला से एफआईजी की कार्रवाई को स्वीकार कर इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनका कहना है कि उनके ट्वीट का गलत मतलब निकाला गया। मामला एथिक्स फाउंडेशन में है, इस लिए वह इस पर ज्यादा कुछ नहीं कह सकते हैं।