इमोतो के बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। एक ट्विट में कहा गया- ‘मुझे यह सुन कर हैरत हुई कि महिलाएं इस पर शोर मचा रही हैं कि प्रोफेशनल स्पोर्ट्स के कवरेज में लैंगिक समानता नहीं है। आखिर इन महिलाओं के लिए पैसा कहां से आता है?’ पर्यवेक्षकों के मुताबिक सोशल मीडिया पर आई टिप्पणियों से यही जाहिर होता है कि जापानी समाज का बड़ा हिस्सा आज भी लैंगिक समानता की बात सुनने को तैयार नहीं है।
गौरतलब है कि इस साल फरवरी में जापान की ओलंपिक समिति के प्रमुख योशिरो मोरी को लिंगभेदी टिप्पणी करने के कारण अपना पद छोड़ना पड़ा था। मोरी ने कहा था कि महिलाएं बैठकों के दौरान बहुत बोलती हैं। उसके एक महीना बाद टोक्यो ओलंपिक खेलों के लिए नियुक्त क्रिएटिव डायरेक्टर हिरोशी ससाकी ने टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका की तुलना 'सुअर' से कर दी। तब उन्हें भी अपना पद छोड़ना पड़ा।
इन्हीं विवादों के बीच टोक्यो ओलंपिक के आयोजकों ने लैंगिक समानता वॉचडॉग के गठन का फैसला किया। इसके प्रमुख के तौर पर इमोतो की नियुक्ति हुई, जो संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ के लिए काम करती हैँ। गौरतलब है कि अपने लिंगभेदी नजरिए के कारण जापानी मीडिया पहले भी कठघरे में खड़ा होता रहा है।
टोक्यो स्थित ग्रैजुएट स्कूल में पत्रकारिता की शिक्षक काओरी हयाशी ने पिछले दिनों एक सम्मेलन में कहा था कि जापानी मीडिया पर पुरुष हावी हैं। इसीलिए वह लैंगिक स्टीरियो टाइप इमेज बनाने में जुटा रहता है। जापानी समाचार एजेंसी क्योदो की एक खबर के मुताबिक जापान के न्यूज चैनलों में सर्वोच्च पद पर एक भी महिला नहीं है। अखबारों के चार प्रमुख इंडस्ट्री एसोसिएशनों में कुल 159 लोग हैं, जिनमें सिर्फ तीन महिलाएं हैं। जापान दुनिया के विकसित देशों में एक है। लेकिन वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम की जेंडर गैप रैंकिंग में इस साल उसे 30वें नंबर पर बताया गया था।