पैरा बैडमिंटन कोच गौरव खन्ना की बदौलत ही पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पैरा बैडमिंटन ने ऊंचाईयों को छुआ और इस बार उनका नाम द्रोणाचार्य पुरस्कार की सूची में चार अन्य के साथ शामिल हैं। भारतीय पैरा पॉवरलिफ्टिंग संस्थापक और राष्ट्रीय कोच विजय मुनीशवार को खेल को अपनी सेवायें देने के लिए द्रोणाचार्य आजीवन पुरस्कार हासिल करने वालों की सूची में शामिल किया गया।
ध्यानचंद पुरस्कार पाने वालों में जे रंजीत कुमार और सत्य प्रकाश तिवारी को सूची में चुना गया है। भारतीय पैरालंपिक समिति की अध्यक्ष दीपा मलिक ने विज्ञप्ति में कहा, ‘ये सम्मान देश में पैरालंपिक आंदोलन की दिशा में बढ़ने के लिए बड़ी प्रेरणा हैं। हमारे खिलाड़ियों और कोचों को पैरालंपिक सपनों को पूरा करने के लिए ये पुरस्कार बिलकुल सही समय आए है। सभी पुरस्कार हासिल करने वालों को दिल से बधाई।'
24 साल के मरियप्पन तब सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने रियो 2016 पैरालंपिक खेलों के पुरूषों के ऊंची कूद टी42 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था और पिछले साल दुबई में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में कांस्य पदक अपने नाम किया था। अर्जुन और पद्म श्री हासिल कर चुके मरियप्पन के लिए यह सम्मान टोक्यो 2020 पैरालंपिक खेलों की तैयारियों के लिए प्रेरणा का काम करेगा।
वहीं चौधरी ने इंडोनेशिया 2018 एशियाई पैरा खेलों में विश्व रिकॉर्ड के साथ भारत को पहला पदक दिलाया था और 2019 में दुबई में पुरूष भाला फेंक एफ64 वर्ग में अपने रिकॉर्ड को बेहतर करते हुए वह विश्व चैंपियन बने थे। वह टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के लिए भारत के प्रबल दावेदारों में शामिल हैं।
18 वर्ष के नरवाल अर्जुन पुरस्कार हासिल करने वाले दूसरे पैरा निशानेबाज होंगे, उनसे पहले 1997 में नरेश कुमार ने यह पुरस्कार हासिल किया था। इस पुरस्कार से निश्चित रूप से इस युवा को प्रेरणा मिलेगी जो पिछले तीन वर्षों में 19 राष्ट्रीय और 17 अंतरराष्ट्रीय पदक जीतकर अपनी प्रतिभा से सनसनी फैला दी थी।