दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुक्केबाज अरुंधति चौधरी द्वारा तुर्की में महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में 70 किग्रा भार वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व करने की मांग वाली याचिका पर बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया और अन्य को नोटिस जारी किया है। राष्ट्रीय चैंपियन अरुंधति चौधरी ने महिला विश्व चैंपियनशिप के लिए बिना ट्रायल के टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली लवलीना बोरगोहेन को चुने जाने के कारण संघ के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। विश्व मुक्केबाजी महिला चैंपियनशिप का आयोजन 4 से 19 दिसंबर के बीच टर्की में होने जा रहा है।
बीएफआई ने कोर्ट को दिया जवाब
अपने जवाब में बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि अरुंधति चौधरी का नाम महिला विश्व चैंपियनशिप में 70 किग्रा भार वर्ग में आरक्षित मुक्केबाज के रूप में है। बीएफआई ने पहले ही टूर्नामेंट में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए टोक्यो ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोर्गोहेन को चुना है।
क्या है मामला
बीते दिनों भारतीय मुक्केबाजी संघ ने टर्की में होने वाली विश्व मुक्केबाजी महिला चैंपियनशिप के लिए अरुंधति चौधरी को दरकिनार कर टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली लवलीना बोरगोहेन के चुना। बीएफआई के इस फैसले पर यूथ बॉक्सिंग की विश्व चैंपियन अरुंधति ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली लवलीना का चयन बिना कोई ट्रायल लिए 70 किलोग्राम भार वर्ग में कर दिया। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने यह भी कहा था कि ओलंपिक में जिस कांस्य पदक जीतने वाली खिलाड़ी को बीएफआई ने वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिेए चुना है उसे उन्होंने हमेशा ट्रायल में हराया है। उन्होंने ने यह भी कहा कि मैं विश्व चैंपियनशिप में हर तरह से भाग लेने के काबिल हूं। अरुंधति के मुताबिक, फेडरेशन ने मेरा चयन न करके उन खिलाड़ियों के साथ भी अन्याय किया है जो दुनिया में भारत का परचम लहराने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं।