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दुनिया का वो महान खिलाड़ी, जिसने रंगभेद के कारण नदी में फेंक दिया था ओलंपिक गोल्ड

अमित कुमार, नई दिल्ली  Published by: अमित कुमार Updated Wed, 03 Jun 2020 04:50 PM IST
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मोहम्मद अली - फोटो : Twitter

ओलंपिक गोल्ड...किसी भी खिलाड़ी का सबसे बड़ा सपना। गले में पदक पहने पोडियम पर खड़े अपने देश के झंडे को सबसे ऊपर फहराते देखना और स्टेडियम में राष्ट्रगान सुनने से ज्यादा सुखद अनुभव शायद ही कुछ और हो। हर खिलाड़ी सिर्फ इस एक लम्हे के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देता है। जीता है, मरता है। मगर क्या कोई इसी 'सम्मान' को खुद अपने हाथों से दूर कर सकता है?

क्या आप सोच सकते हैं कि ऐसे वक्त में उस पर क्या बीत रही होगी, जब उसने ऐसा बड़ा कदम उठाने के बारे में सोचा होगा। एक नाम जिसे हम बचपन से सुनते आ रहे हैं, उसने अपने जीवन की सबसे अनमोल धरोहर को खुद अपने हाथों से नदी में फेंक दिया था। इस अनमोल धरोहर को उसने रोम ओलंपिक में हासिल किया था। उसका नाम था अली...मोहम्मद अली।



साल 2016 में आज ही के दिन 3 जून को इस महान मुक्केबाज ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। करियर में 61 फाइट लड़ी, जिनमें से सिर्फ पांच में हार मिली। 1960 रोम ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीता। 18 साल की कम उम्र में अपने देश अमेरिका के लिए सम्मान जीता। मोहम्मद अली ने वो सब किया, जो एक खिलाड़ी के तौर पर अपने देश का नाम रोशन करने के लिए कोई कर सकता था। 



मगर अपने करियर में 37 बार विपक्षी मुक्केबाजों को नॉकआउट करने वाला यह महान खिलाड़ी अपने ही देश में रंगभेद से हार गया। मोहम्मद अली का नाम कैसियस क्ले जूनियर था। रोम ओलंपिक में महज 18 साल की उम्र में उन्होंने तहलका मचा दिया था। विपक्षी मुक्केबाज उनके खिलाफ एक भी अंक हासिल नहीं कर पाए और यह युवा मुक्केबाज हर फाइट को 5-0 के अंतर से जीतता चला गया और ओलंपिक गोल्ड हासिल किया। 

युवा कैसियस क्ले को लगा कि देश को इतना बड़ा सम्मान दिलाने के बाद तो हर कोई प्यार करेगा। सम्मान देगा, लेकिन ऐसा नहीं था...। 

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मोहम्मद अली - फोटो : Twitter
ओलंपिक गोल्ड...किसी भी खिलाड़ी का सबसे बड़ा सपना। गले में पदक पहने पोडियम पर खड़े अपने देश के झंडे को सबसे ऊपर फहराते देखना और स्टेडियम में राष्ट्रगान सुनने से ज्यादा सुखद अनुभव शायद ही कुछ और हो। हर खिलाड़ी सिर्फ इस एक लम्हे के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देता है। जीता है, मरता है। मगर क्या कोई इसी 'सम्मान' को खुद अपने हाथों से दूर कर सकता है?

क्या आप सोच सकते हैं कि ऐसे वक्त में उस पर क्या बीत रही होगी, जब उसने ऐसा बड़ा कदम उठाने के बारे में सोचा होगा। एक नाम जिसे हम बचपन से सुनते आ रहे हैं, उसने अपने जीवन की सबसे अनमोल धरोहर को खुद अपने हाथों से नदी में फेंक दिया था। इस अनमोल धरोहर को उसने रोम ओलंपिक में हासिल किया था। उसका नाम था अली...मोहम्मद अली।

साल 2016 में आज ही के दिन 3 जून को इस महान मुक्केबाज ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। करियर में 61 फाइट लड़ी, जिनमें से सिर्फ पांच में हार मिली। 1960 रोम ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीता। 18 साल की कम उम्र में अपने देश अमेरिका के लिए सम्मान जीता। मोहम्मद अली ने वो सब किया, जो एक खिलाड़ी के तौर पर अपने देश का नाम रोशन करने के लिए कोई कर सकता था। 



मगर अपने करियर में 37 बार विपक्षी मुक्केबाजों को नॉकआउट करने वाला यह महान खिलाड़ी अपने ही देश में रंगभेद से हार गया। मोहम्मद अली का नाम कैसियस क्ले जूनियर था। रोम ओलंपिक में महज 18 साल की उम्र में उन्होंने तहलका मचा दिया था। विपक्षी मुक्केबाज उनके खिलाफ एक भी अंक हासिल नहीं कर पाए और यह युवा मुक्केबाज हर फाइट को 5-0 के अंतर से जीतता चला गया और ओलंपिक गोल्ड हासिल किया। 

युवा कैसियस क्ले को लगा कि देश को इतना बड़ा सम्मान दिलाने के बाद तो हर कोई प्यार करेगा। सम्मान देगा, लेकिन ऐसा नहीं था...। 

रिंग में न हारने वाला शख्स आखिर हार गया

Muhammad Ali - फोटो : Twitter
गोरे अमेरिकियों को कैसियस क्ले के काले रंग के सामने ओलंपिक पदक का सुनहरा रंग दिखा ही नहीं। मोहम्मद अली एक रेस्टोरेंट में जाना चाहते थे, लेकिन वो सिर्फ गोरों के लिए था। इसमें उन्हें नहीं जाने दिया गया। 

यही नहीं सड़क पर कुछ श्वेत लोगों ने उनसे उनका पदक भी छीनने की कोशिश की। बस यही वो पल थे, जब रिंग में न हारने वाला शख्स अपने ही लोगों से हार गया। जिस गोल्ड मेडल को जीतने की खुशी अभी पूरी तरह से उन्होंने महसूस भी नहीं की थी, उसी गोल्ड मेडल को मोहम्मद अली ने ओहियो नदी में फेंक दिया। यह वही रंगभेद की आग है, जिसमें अमेरिका आज एक बार फिर से जल रहा है। 



...और कैसियस क्ले बन गए मोहम्मद अली 

कैसियस क्ले जूनियर इतने व्यथित थे कि अपनी पहचान तक बदल ली। वो नाम, वो धर्म, जो जन्म से उनके साथ था, उसे भी छोड़ दिया। इस्लाम अपनाकर उन्होंने अपना नाम मोहम्मद अली रख लिया। और तब से मुक्केबाजी का पर्याय बन गया यह एक नाम, अली...मोहम्मद अली। 
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