ओलंपिक गोल्ड...किसी भी खिलाड़ी का सबसे बड़ा सपना। गले में पदक पहने पोडियम पर खड़े अपने देश के झंडे को सबसे ऊपर फहराते देखना और स्टेडियम में राष्ट्रगान सुनने से ज्यादा सुखद अनुभव शायद ही कुछ और हो। हर खिलाड़ी सिर्फ इस एक लम्हे के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देता है। जीता है, मरता है। मगर क्या कोई इसी 'सम्मान' को खुद अपने हाथों से दूर कर सकता है?
क्या आप सोच सकते हैं कि ऐसे वक्त में उस पर क्या बीत रही होगी, जब उसने ऐसा बड़ा कदम उठाने के बारे में सोचा होगा। एक नाम जिसे हम बचपन से सुनते आ रहे हैं, उसने अपने जीवन की सबसे अनमोल धरोहर को खुद अपने हाथों से नदी में फेंक दिया था। इस अनमोल धरोहर को उसने रोम ओलंपिक में हासिल किया था। उसका नाम था अली...मोहम्मद अली।