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Manu-Jaspal: वह मेरे लिए पिता की तरह हैं...मनु ने कोच जसपाल राणा की तारीफ में पढ़े कसीदे, जानें क्या कहा

Sun, 18 Aug 2024 05:56 PM IST
Mayank Tripathi स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय दल ओलंपिक में कुल छह पदक अपने नाम करने में कामयाब रहा। इनमें से दो मनु भाकर ने जीते। उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा और सरबजोत के साथ मिलकर 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित स्पर्धा में कांस्य पदक जीते।
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मनु भाकर - फोटो : twitter
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विस्तार
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पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली मनु भाकर ने रविवार को अपने कोच जसपाल राणा की तारीफ की। उन्होंने बताया कि वह कोच को अपने पिता की तरह मानती हैं। भारतीय दल ओलंपिक में कुल छह पदक अपने नाम करने में कामयाब रहा। इनमें से दो मनु भाकर ने जीते। उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा और सरबजोत के साथ मिलकर 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित स्पर्धा में कांस्य पदक जीते। वह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली एक ही संस्करण में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गईं।
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मनु भाकर और उनके कोच - फोटो : अमर उजाला
मनु और राणा के बीच टोक्यो ओलंपिक के बाद मतभेद हो गया था लेकिन दोनों फिर से साथ आये और पेरिस ओलंपिक में मनु ने दो कांस्य पदक जीत कर इतिहास रच दिया। रविवार को मनु ने कहा-  वह (जसपाल राणा) मेरे लिए पिता की तरह हैं और यह भरोसे की बात है कि आप एक व्यक्ति पर विश्वास करते हैं। जब भी कुछ करने को लेकर मेरे मन में संदेह होता है तो वह मेरी हौसला अफजाई करते हैं। वह मुझे चांटा भी लगा सकते हैं और कहते है कि तुम इसे कर सकती हो, तुमने इसके लिए प्रशिक्षण लिया है।

मनु भाकर और उनके कोच - फोटो : अमर उजाला
इस पर राणा ने उन्हें टोका। वहीं, मनु ने अपनी बातों को स्पष्ट करते हुए कहा - चांटा मारने से मेरा मतलब थप्पड़ नहीं है। मैं यह कहना चाह रही हूं कि वह मुझे अपनी सीमाओं को तोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। वह ऐसा कहेंगे कि आप इसके लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं और जाहिर तौर पर आप अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम होंगे।
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मनु भाकर और उनके कोच - फोटो : अमर उजाला
वहीं, टोक्यो ओलंपिक के दौरान हुए विवाद के बाद दोनों ने 14 महीने एक बार फिर नई शुरुआत की। राणा ने कहा- जब हमने 14 महीने पहले शुरुआत की थी, तो मेरी तरफ से उनसे केवल एक ही अनुरोध था कि हम अतीत पर चर्चा नहीं करेंगे। हम यहीं से शुरुआत करेंगे और आगे बढ़ेंगे। हमने इस चीज को पूरे समय तक बनाए रखा।

उन्होंने कहा- मेरा काम उसका मार्गदर्शन करना है। यह केवल कोचिंग नहीं है। इस स्तर पर, हम उन्हें यह नहीं सिखा सकते कि कैसे देखना है या ट्रिगर कैसे खींचना है। हमें सिर्फ निराशा और अति आत्मविश्वास से बचाने की जरूरत थी।
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