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कहानी भारत के एकमात्र हॉकी विश्व कप की, जब मैच नहीं खिलाने पर उदास थे असलम

Mon, 15 Mar 2021 10:38 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में विजयी गोल दागने वाले अशोक को याद है किस तरह मलेशिया के खिलाफ छूट गए थे पसीने
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1975 हॉकी विश्व कप विजेता टीम - फोटो : ट्विटर @sports_odisha
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विस्तार
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बात भले पुरानी हो गई हो पर सच्चाई यह है कि भारतीय खेलों के इतिहास में 15 मार्च का दिन बेहद अहम है। इसी दिन 46 साल पहले अजीत पाल सिंह की अगुवाई में भारतीय हॉकी टीम ने कुआलालंपुर में अपना पहला और एकमात्र विश्व कप जीता था। भारत पाकिस्तान को 2-1 से हराकर विश्व विजेता बना था, लेकिन फाइनल में विजयी गोल दागने वाले अशोक कुमार को मेजबान मलेशिया के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले के अंतिम क्षण नहीं भूलते हैं। यह वह क्षण थे जब भारत 1-2 से पीछे था और मैच खत्म होने में पांच मिनट बचे थे। यहां असलम शेर खान को माइकल किंडो की जगह भेजना टीम के लिए पुर्नजन्म बन गया 

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मैच नहीं खिलाए जाने पर उदास थे असलम
अशोक को याद करते हैं कि मलेशिया से सेमीफाइनल मैच से पहले बस होटल से मर्डेका स्टेडियम जा रही थी। फरमाइश पर गानों का दौर चल पड़ा था। वह गाने गा रहे थे, लेकिन असलम चुप थे। किसी ने पूछा असलम उदास क्यों हो? उन्होंने कहा कि उन्हें क्यों नहीं खिलाया जा रहा?  दरअसल असलम टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं खेले थे। टीम सदस्यों और उन्होंने असलम से कहा कि जिस तरह 1936 के ओलंपिक में उनके पिता ध्यानचंद ने तुम्हारे पिता अहमद शेर खान की सेवाएं लीं उसी तरह तुम्हें भी खिलाया जाएगा।  



स्टिक पर गेंद के पहले टच से आया गोल 
यहां बात खत्म हो गई। मर्डेका स्टेडियम में 45 से 50 हजार दर्शक थे। मलेशिया हॉलैंड जैसी टीम को हराकर आई थी और उसके समर्थकों ने स्टेडियम सिर पर उठा रखा था। अशोक याद करते हैं कि एक के बाद एक हमले हो रहे थे, लेकिन गोल नहीं आ रहा था। टीम के पसीने छूटे हुए थे। ऐसे में माइकल किंडो की जगह असलम शेर खान को भेजा गया। इस दौरान उन्होंने पेनाल्टी कार्नर दिला दिया। असलम ने अब तक स्टिक से गेंद टच भी नहीं की थी कि कप्तान ने कहा कि सुरजीत की जगह उन्हें हिट लगानी है। गोविंदा ने गेंद पुश की अजीत पाल ने उसे रोका और उन्होंने असलम की हिट के बाद सीधे गोल पोस्ट पर गेंद टकराने की आवाज सुनी। फिर क्या था थोड़ी ही देर में हरचरण ने गोल कर टीम को फाइनल में पहुंचा दिया।
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फाइनल में भी असलम ने किया कमाल
इस गोल का नतीजा यह हुआ कि असलम को फाइनल में किंडो की जगह खिलाया गया। अशोक खुलासा करते हैं कि यह असलम ही थे जिन्होंने कम से कम तीन से चार गोल बचाए अगर वह नहीं होते तो मैच का परिणाम दूसरा हो सकता था। इसी तरह पाक के पास मंजूर जूनियर नहीं होते तो भारत की जीत का अंतर और बड़ा होता। अशोक बताते हैं कि उन्होंने और गोविंदा ने मैच से पहले रणनीति बनाई कि आक्रमण के दौरान अगर उनसे गेंद छिनती है और पलट के आक्रमण होता है तो वे दोनों सीधे 25 गज की रेखा पर जाकर रक्षण करेंगे। पूरे मैच में उन्होंने यही किया और यह आपसी समझ काफी काम आई।

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