टोक्यो में भारतीय टीम ने एकजुट होकर खेल दिखाया। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टूर्नामेंट में टीम के 11 खिलाड़ियों ने गोल दागे हैं। इनमें रुपिंदर पाल सिंह, हरमनप्रीत सिंह, दिलप्रीत सिंह, सिमरनजीत सिंह, वरुण कुमार, विवेक प्रसाद, गुजरांत, शमशेर, नीलकंटा, हार्दिक और मनदीप सिंह के नाम शामिल हैं।
रियो में लय नहीं तलाश सकी थी टीम
इससे पहले रियो ओलंपिक में टीम इंडिया अपनी लय नहीं पा सकी थी और अंतिम-8 से ही बाहर हो गई थी। इसका सबसे बड़ा कारण था- टीम के सिर्फ आधे खिलाड़ियों का जीत में योगदान देना। इस टूर्नामेंट में भारत के सिर्फ छह खिलाड़ी ही गोल कर पाए थे। इनमें रघुनाथ, रुपिंदर सिंह, चिंगलेंसना सिंह, कोथाजीत खडंगबम, अक्षदीप सिंह और रमनदीप सिंह के नाम शामिल थे।
रियो के मुकाबले टोक्यो में दोगुने गोल किए
टीम इंडिया ने रियो के मुकाबले टोक्यो में दोगुने गोल दागे। रियो में भारतीय टीम कुल छह मैचों में 10 गोल ही कर पाई थी। इस दौरान भारत सिर्फ दो मैच ही जीत पाया था और एक मुकाबला ड्रॉ रहा था। वहीं, टोक्यो में भारत ने अब तक सात मैच खेले हैं, जिसमें उसे पांच में जीत और दो में हार का सामना करना पड़ा है। इस दौरान भारत ने कुल 20 गोल दागे हैं।
टीम इंडिया के डिफेंस में सुधार की गुंजाइश है। हालांकि, इसमें लगातार सुधार देखा जा रहा है। रियो में भारत के खिलाफ कुल 12 गोल किए गए थे। यह आंकड़ा भारत की ओर से किए गए गोल से ज्यादा था। वहीं, इस बार टोक्यो में भारत ने खुद किए गोल से कुछ कम यानी 19 गोल खाए हैं।
टोक्यो में पदक की उम्मीद कायम
टोक्यो में भारत की मेडल जीतने की उम्मीद अभी कायम है। कांस्य पदक के लिए 5 अगस्त को मुकाबला खेला जाएगा। इससे पहले दूसरे सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी की टीम के बीच भिड़ंत होगी। उसमें से जो टीम हारेगी, उसके साथ कांस्य पदक के लिए भारत का मुकाबला होगा। भारतीय हॉकी टीम साल 1980 के बाद से ओलंपिक में पदक नहीं जीती है।