टोक्यो ओलंपिक के सेमीफाइनल में भारतीय महिला टीम
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ओलंपिक में महिला हॉकी के पहले सेमीफाइनल में बुधवार को भारत का सामना अर्जेंटीना से होगा। मुकाबला दोपहर साढ़े तीन बजे से खेला जाएगा। अर्जेंटीना वर्ल्ड रैंकिंग में इस वक्त दूसरे स्थान पर है, जबकि भारत सातवें नंबर पर है। भारत तीन बार की ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट ऑस्ट्रेलिया को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचा है। वहीं, अर्जेंटीना ने क्वार्टर फाइनल में 2016 के रियो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले ब्रिटेन को 3-0 हराया था।
ओलंपिक में अर्जेंटीना के पास दो रजत और दो कांस्य
भारत को अर्जेंटीना के खिलाफ सतर्क रहना होगा। भारत की तरह अर्जेंटीना ने भी ओलंपिक में महिला हॉकी में एक भी स्वर्ण पदक नहीं जीता है। हालांकि, अर्जेंटीना सिडनी और लंदन ओलंपिक में रजत पदक अपने नाम कर चुका है। इसके अलावा उसने एथेंस और बीजिंग ओलंपिक में भी कांस्य पदक जीता था। वहीं, भारतीय महिला टीम अब भी अपने पहले ओलंपिक मेडल का इंतजार कर रही है।
भारत पहली बार सेमीफाइनल खेल रहा
अर्जेंटीना के मुकाबले भारत की महिला टीम के पास ओलंपिक के नॉकआउट मुकाबले खेलने का अनुभव कम है। भारत पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचा है। वहीं, अर्जेंटीना के पास दो बार फाइनल खेलने का अनुभव है। हालांकि, दोनों बार उसे रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा था। ऐसे में भारत पर बड़े मुकाबले का ज्यादा दबाव रह सकता है।
पुरुष टीम की इन गलतियों से बचना होगा
ओलंपिक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब भारत की महिला और पुरुष दोनों टीमें सेमीफाइनल में पहुंची। यहां पुरुष टीम को बेल्जियम ने 5-2 से हराकर गोल्ड की रेस से बाहर कर दिया। इस मैच में पुरुष टीम ने कई गलतियां कीं, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। इनसे सबक लेते हुए भारत की महिला टीम को अर्जेंटीना के खिलाफ मैदान में उतरना होगा। 3 पॉइंट्स में जानिए ऐसी 3 गलतियां जिनसे भारतीय महिला टीम बचना चाहेगी...
1. कमजोर डिफेंस यानी हार
भारतीय पुरुष टीम ने अपने सेमीफाइनल मुकाबले में तीन क्वार्टर तक तो पकड़ बनाए रखी, लेकिन आखिरी क्वार्टर में डिफेंस काफी बिखरा हुआ नजर आया। इसका फायदा उठाते हुए बेल्जियम ने अहम पलों में तीन गोल कर मैच ही पलट दिया।
इसी तरह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबला छोड़ दें, तो भारत की महिला टीम का डिफेंस काफी कमजोर रहा है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत ने एक भी गोल नहीं खाया और 1-0 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। अब अर्जेंटीना के खिलाफ भी भारत को इसी डिफेंस स्ट्रैटजी पर कायम रहना होगा।
2. पैनल्टी कॉर्नर
पुरुष हॉकी के सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने बेल्जियम को 14 पैनल्टी कॉर्नर दिए। भारतीय टीम अधिकतर समय अपने डी में ही रही और एक के बाद एक गलतियां करती रही। इससे सबक लेते हुए महिला टीम को अर्जेंटीना को पैनल्टी कॉर्नर देने से बचना होगा। जरूरत से ज्यादा मौके देने पर अर्जेंटीना जैसी मजबूत टीम चंद मिनटों में ही मैच का पासा पलट सकती है।
3. डिफेंस के साथ अटैक
पुरुष टीम बेल्जियम के खिलाफ के आखिरी समय में कुछ ज्यादा ही बचाव की रणनीति पर फोकस कर रही थी। इस वजह से बेल्जियम को गोल करने को मौका मिला। ऐसे में भारतीय महिला टीम को डिफेंस के साथ अटैक भी करना होगा। बॉल के साथ टीम को अर्जेंटीना के डी में ज्यादा से ज्यादा समय बिताना होगा, ताकि भारत के लिए गोल करने के ज्यादा से ज्यादा मौके बन सकें।
भारत की ताकत और कमजोरी
भारत की महिला हॉकी टीम की सबसे बड़ी ताकत है- कमबैक करने की क्षमता और कभी हार न मानने का जज्बा। टोक्यो में शुरुआती 3 मैच हारने के बाद टीम ने शानदार वापसी की और दक्षिण अफ्रीका और आयरलैंड को हराकर चौथे स्थान पर रही। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में तीन बार की स्वर्ण पदक विजेता ऑस्ट्रेलिया को हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाई।
इस टूर्नामेंट में टीम इंडिया की दो कमजोरियां रही हैं- लचर डिफेंस और पैनल्टी कॉर्नर को गोल में न बदल पाना। क्वार्टर फाइनल को छोड़ दें, तो बाकी मैचों में भारत का डिफेंस कुछ खास नहीं रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टोक्यो में अब तक टीम ने आठ गोल किए हैं और 14 गोल खाए हैं।
हेड-टू-हेड
ओलंपिक से पहले भारत ने अर्जेंटीना का दौरा किया था। यहां भारत ने कुल सात मैच खेले थे। शुरुआती दो मैच अर्जेंटीना की जूनियर वुमंस टीम के साथ हुए थे। दोनों मुकाबले ड्रॉ रहे थे। इसके बाद भारत ने दो मैच अर्जेंटीना-बी के खिलाफ खेले थे। दोनों में उसे हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भारत का सामना अर्जेंटीना की सीनियर टीम से हुआ था। इसमें भारत को दो मैच में हार मिली थी और एक मैच ड्रॉ रहा था।
सविता पुनिया पर नजर
देशवासियों की नजर गोलकीपर सविता पुनिया पर होंगी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नौ गोल शॉट बचाकर भारत को सेमीफाइनल में पहुंचाया था। इस प्रदर्शन से 41 साल में पहली बार भारत के लिए महिला हॉकी में पदक की उम्मीद जागी है।
भारतीय टीम मास्को ओलंपिक 1980 में चौथे स्थान पर रही थी, लेकिन केवल छह टीमों ने हिस्सा लिया था और मैच राउंड रॉबिन आधार पर खेले गए थे। भारतीय महिला हॉकी टीम अपने पूल में दक्षिण अफ्रीका और आयरलैंड को हराकर चौथे स्थान पर रही थी, जबकि ऑस्ट्रेलिया अपने पूल में शीर्ष पर रहा था।
भारतीय महिला टीम
गोलकीपर: सविता पुनिया
फॉरवर्ड: रानी रामपाल (कप्तान), लालरेमसामी, वंदना कटारिया, शर्मिला देवी
डिफेंडर: दीप ग्रेस एक्का, निक्की प्रधान, गुरजीत कौर, उदिता
मिडफील्डर: निशा, नेहा गोयल, सुशीला चानू, मोनिका मलिक, नवजोत कौर, सलिमा टेटे, नवनीत कौर
अर्जेंटीना महिला टीम
गोलकीपर: मारिया बेलेन सुक्की
फॉरवर्ड: अगस्टिना अलबर्टेरियो, मारिया जोस ग्रैनेटो, मारिया जोस ग्रैनेटो, डेल्फिनो मरिनो, जूलिएटा जंकुनास
डिफेंडर: अगस्टिना जॉर्जेलानी, डि लॉस लैनोस वैलेंटिना रैपोसो रुइस, मारिया विक्टोरिया ग्रैनेटो, मारिया इमीलिया फॉरचेरियो, मारिया नोएल बैरियोनुएवो, वैलेंटिना इसाबेल कोस्टा बियोंडी
मिडफील्डर: सोफिया टोक्कालिनो, अगस्टिना अलोंसो, मॉकियो रोसियो सैनचेज, वल्डेज विक्टोरिया साउजे, इयूजेनिया मारिया ट्रिंचिनेट्टी, मिकाएला रेतेगुई, सोफिया मैकेरी