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भारतीय हॉकी टीम में दुनिया की शीर्ष टीमों को हराने का दम, सबूत हैं ये आंकड़े

Mon, 26 Nov 2018 04:40 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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indian hockey team
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लाख टके का सवाल है कि क्या तीसरी बार पुरुष हॉकी विश्व कप की मेजबानी करने पर भारत की घर में खिताब जीतने की हसरत पूरी होगी? क्या दुनिया की नंबर एक और पिछली दो बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया की टीम ओडिशा हॉकी विश्व कप में खिताब बरकरार रख कर खिताबी जीत की हैट-ट्रिक पूरी करेगी? इस बाबत मंथन करने पर पाएंगे कि ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड और ओलंपिक चैंपियन अर्जेंटीना ओडिशा हॉकी विश्व कप में शिरकत करने वाली हर लिहाज से सबसे संतुलित और खिताब जीतने की प्रबल दावेदार हैं।

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ऑस्ट्रेलिया और पिछली बार अपने घर हेग में उपविजेता रहे नीदरलैंड के पास पाकिस्तान के रिकॉर्ड चार बार हॉकी विश्व कप जीतने के रिकॉर्ड की बराबरी करने का मौका है। फिर भी यदि किसी एक टीम को इस बार विश्व कप खिताब जीतने को चुनना हो तो वह दुनिया की नंबर एक टीम ऑस्ट्रेलिया ही होगा। जैक व्हिटन और ट्रेंट मिटन की मौजूदगी में ऑस्ट्रेलिया की टीम का मैदानी गोल करने में कोई सानी नहीं है और पेनल्टी कॉर्नर जेरमी हेवर्ड के रूप में बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर हैं। ऑस्ट्रेलिया का रक्षण बेजोड़ है।

एफआईएच रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, बेल्जियम, नीदरलैंड, भारत और जर्मनी सरीखी शुरू की छह शीर्ष हॉकी टीमों के बीच हॉकी कौशल के लिहाज से फासला बहुत कम हुआ है। ऐसे में ओडिशा विश्व कप में इनमें किसी भी टीम के अपने से उंची रैंक की टीमों को हरा कर उलटफेर करने से इनकार नहीं किया जा सकता है। जीवट और अपने कभी हार न मानने के जज्बे के कारण जर्मनी की टीम छुपा रूस्तम साबित हो सकती है। दिन विशेष इनमें से कोई भी टीम किसी को भी हरा सकती है। विश्व कप में किसी भी टीम को कमतर नहीं आंका जा सकता।

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भारत ने दिखाया है दुनिया की शीर्ष टीमों को हराने का दम

ग्रुप सी : बेल्जियम, भारत, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका

मेजबान भारत की मौजूदा फॉर्म के आधार पर उसमें सेमीफाइनल में पहुंचने का दम जरूर नजर आता है। भारत और बेल्जियम के बीच पूल सी में शीर्ष पर रहकर क्वॉर्टर फाइनल में जगह के लिए दिलचस्प संघर्ष होगा। भारत को बस आखिरी क्षणों में ढील दिखाने से बचना होगा क्योंकि इसी के चलते अक्सर उसके हाथ से जीत फिसलती जाती रही है। यूं भी इतिहास गवाह है कि कामयाबी के लिए हॉकी कौशल के साथ किस्मत भी चाहिए। भारत को किस्मत का कुछ  साथ मिला तो फिर कुछ भी मुमकिन है।

भारत पूल सी में दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और दुनिया की तीसरे नंबर की टीम ओलंपिक रजत पदक विजेता बेल्जियम के साथ है। बेल्जियम की टीम में टॉम बून, जॉन जॉन डोमैन और ऑर्थर वॉन जैसे अकेले दम मैच जिताने वाले कई खिलाड़ी हैं। जकार्ता एशियाई खेलों में मलयेशिया के खिलाफ सेमीफाइनल में आखिरी 90सेकंड को छोड़ दें तो भारतीय टीम ने उससे पहले ब्रेडा में मेजबान ऑस्ट्रेलिया से चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में बेहद कड़े संघर्ष के बाद शूटआउट में हारने से पहले चीफ कोच हरेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में दुनिया की शीर्ष टीमों को टक्कर देने का दम भी दिखाया है।

घरेलू दर्शकों के सामने चीफ  कोच हरेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में ओडिशा हॉकी विश्व कप में शिरकत करने वाली मेजबान भारतीय टीम की चुनौती को खारिज नहीं किया जा सकता है। भारत के चीफ  कोच हरेन्द्र सिंह के लिए यह विश्व कप बड़ा इम्तिहान होगा। हरेन्द्र तिरंगे के लिए सर्वश्रेष्ठ करने का जज्बा जिस तरह से भारतीय खिलाड़ियोंमें भरते हैं उससे बस आखिरी क्षणों की ढील पर भारत ने काबू पाया तो वह इस बार विश्व कप में वह पदक जरूर जीत सकता है। ओडिशा हॉकी विश्व कप में शिरकत करने जा रही सेंटर हाफ कप्तान मनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली भारतीय टीम खासी युवा है।

भारत के आक्रमण और रक्षण की अहम कड़ी होंगे सेंटर हाफ कप्तान मनप्रीत सिंह के सामने अपने पूर्ववर्ती सरदार सिंह जैसी मैदान पर 'सरदारी' दिखाने की चुनौती होगी। आलोचक भले कहे कि भारतीय टीम में अनुभव की कमी है लेकिन हकीकत यही है कि मौजूदा फॉर्म के आधार पर भारत के पास इस विश्व कप के लिए इससे बेहतर टीम नहीं हो सकती थी। भारत आखिरी क्षणों की गलती से बचा रहा तो वह घर में विश्व कप में पदक जीतने  की हसरत पूरी कर सकता है।

आकाशदीप और ललित को निभाना होगा लिंकमैन का रोल

कप्तान मनप्रीत सिंह को ओवरलैप का आक्रामक सेंटर हाफ और फिलहाल टीम में बतौर स्ट्राइकर आकाशदीप सिंह और ललित उपाध्याय को खुद गोल करने के लोभ से बचते हुए लिंकमैन का रोल निभाना होगा। आकाशदीप और ललित को  लिंकमैन के रूप में यंग दिलप्रीत सिंह, सिमरजनीत  व मनप्रीत के लिए गोल करने के लिए आगे वैसे ही गेंद बढ़ानी होगी जैसी अतीत में कभी धनराज पिल्लै और बलजीत ढिल्लों  गोल करने में माहिर गगनअजित सिंह और दीपक ठाकुर के लिए बढ़ाते थे।

रूपिंदर पाल सिंह की गैरमौजूदगी में भारत ड्रैग फ्लिक से गोल करने के लिए मुख्य रूप से हरमनप्रीत सिंह पर निर्भर करेगा लेकिन वरुण कुमार और अमित रोहिदास उसके तुरुप के इक्के साबित हो सकते हैं। रोहिदास फ्रीमैन के रूप में रक्षण और  आक्रमण की अहम कड़ी होंगे ही साथ ही प्रतिद्वंद्वी टीम के ड्रैग फ्लिकर के फ्लिक पर गेंद को अपनी हॉकी स्टिक पर रोक कर नाकाम करने की कूवत रखते हैं। भारत को अपने पूल में  बेल्जियम की ताकत का अहसास है जबकि वह कनाडा के खिलाफ 2016 में रियो ओलंपिक में ड्रॉ पर मजबूर रहने के साथ दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बहुत कम खेला है।

भारत की आखिरी क्षणों में गोल खाने की कमजोरी बड़े टूर्नामेंट खासतौर पर विश्व कप और ओलंपिक में हार का सबब बनती रहती है। भारत में हेग में पिछले विश्व कप में भारतीय टीम बहुत अच्छी थी। बेल्जियम और इंग्लैंड से अपने पूल मैच आखिरी  15-16 सेकंड में गोल खाकर करीबी अंतर से अपने मैच हार कर पूल में पांचवें स्थान पर रही थी। भारत ने अंतत: दक्षिण कोरिया को 3-0 से हरा कर नौंवा स्थान पाया था। तब भारत के कोच टैरी वॉल्श ने तब यह कहा था कि टीम पर भरोसा रखे यही टीम आगे अच्छे नतीजे देगी। भारत ने इसके बाद 2014 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत कर उनकी बात को सही साबित किया।

हरेन्द्र सिंह के नौजवानों पर भरोसे की भी होगी परीक्षा

यह दरअसल 2016 में भारत को बतौर चीफ  कोच अपने मार्गदर्शन में जूनियर हॉकी विश्व कप जिताने वाले हॉकी उस्ताद हरेन्द्र सिंह की टीम है। सरदार सिंह के हॉकी को अलविदा कहने और एसवी सुनील और रमणदीप सिंह के मैच फिट न होने के कारण जूनियर हॉकी विश्व कप जीतने वाली टीम के सात खिलडिय़ों -डिफेंडर वरुण कुमार, हरमनप्रीत सिंह, मिडफील्डर नीलकांत शर्मा और सुमित,स्ट्राइकर  मनदीप सिंह और सिमरनजीत सिंह के साथ गोलरक्षक कृष्ण बहादुर पाठक जैसे नौजवान खिलाड़ियों पर चीफ कोच हरेन्द्र सिंह के  भरोसे की भी इस विश्व कप में परीक्षा होगी।

भारतीय टीम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक बीरेन्द्र लाकड़ा और अमित रोहिदास जैसे दोनों आदिवासी फुलबैक चीफ कोच हरेन्द्र सिंह की इस विश्व कप के लिए 18 खिलाड़ियों की सूची में थे।  मिडफील्डर के रूप में कप्तान मनप्रीत सिंह,उपकप्तान चिंगलेनसाना सिंह, फुलबैक कोथाजीत सिंह और बीरेन्द्र लाकड़ा, गोलरक्षक पीआर श्रीजेश, स्ट्राइकर आकाशदीप सिंह, मनदीप सिंह और ललित उपाध्याय का यह दूसरा विश्व कप होगा। बाकी दस खिलाड़ियों का यह पहला विश्व कप होगा। इन सभी का अनुभव इस विश्व कप में भारत के बहुत काम आएगा।

ऑस्ट्रेलिया को इंग्लैंड से ही मिल सकती चुनौती

ग्रुप बी : ऑस्ट्रेलिया ,इंग्लैंड, आयरलैंड, चीन

ऑस्ट्रेलिया महज रैंकिंग में ही दुनिया की नंबर की टीम नहीं है। उसका हाल का प्रदर्शन इस बात का गवाह है कि वह वाकई विश्व कप चैंपियन है। ऑस्ट्रेलिया ने 2014 में भुवनेश्वर में चैंपियंस ट्रॉफी और 2017 में हॉकी वर्ल्ड लीग फाइनल्स जीत कर दिखाया कि यह मैदान उसके लिए लकी है। भारत ब्रेडा में ऑस्ट्रेलिया टीम के रंग में होने के कारण खिताब जीतने के करीब पहंच कर उससे हार गया था। ऑस्ट्रेलिया के पास ट्रेंट मिटन और ब्लैक गोवर्स जैसे स्ट्राइकरों के साथ एडी ओकेनडन और एरोन जेलवस्की जैसे अनुभवी मिडफील्डर हैं।

जेरमी हेवर्ड के रूप में ऑस्ट्रेलिया  के पास बढ़िया ड्रैग फ्लिकर हैं। टेलर लॉवेल के रूप और एंड्रयू चार्टर जैसे गोलरक्षक के रूप में किले की दो मजबूत प्रहरी उसे लगातार तीसरी बार खिताब जीतने का दावेदार बनाते हैं। ऑस्ट्रेलिया को अपने ग्रुप में चुनौती दुनिया की सातवें नंबर की टीम इंग्लैंड से ही मिल सकती है। नैया पार लगाने के लिए इंग्लैंड की उम्मीदें अपने अनुभवी मिडफील्डर लगातार चौथा विश्व कप खेलने जा रहे बैरी मिडलटन पर होगी।

इंग्लैंड के गोल करने का दारोमदार सैम वॉर्ड के साथ आक्रामक मिडफील्डर हैरी मार्टिन और इयान स्लोन पर रहेगा। फिर ऑस्ट्रेलिया से पार पाना इंग्लैंड के लिए मुश्किल होगा। अकेले मजबूत गोलरक्षक डेविड हार्ट के सहारे आयरलैंड के लिए विश्व कप की वैतरणी पार करना मुश्किल होगा, हालांकि उसके पास शेन डॉन्गी के रूप में अच्छा गोल स्कोरर है। चीन के दक्षिण कोरियाई कोच किम संग रयुल  हॉकी उस्ताद का ककहरा भारत में एनआईएस पटियाला में सीखा । चीन को  वह अपने मार्गदर्शन में क्वॉर्टर फाइनल में पहुंचा पाए तो वाकई चमत्कार होगा।
 

भारत ने अब तक महज एक बार जीता है हॉकी विश्व कप

भारत ने शुरू के तीन विश्व कप में एक-एक पायदान उपर चढ़ते हुए तीसरे विश्व कप में दद्दा ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार के निर्णायक गोल से 1975 में क्वालालंपुर में पाकिस्तान को फाइनल में 2-1 से हरा कर खिताब जीता था। भारत को इसके बाद विश्व कप जीते अब 43 बरस हो चुके है।

भारत ने 1971 में बार्सीलोना मे पहले विश्व कप में कांसा और 1973 में एम्सतलवीन में दूसरे विश्व कप में रजत पदक जीता था। भारत इसके बाद तो विश्व कप में पदक जीतने को तरस गया। भारत का सबसे बढिय़ा प्रदर्शन 1982 में बॉम्बे (अब मुंबई) और 1994 में सिडनी विश्व कप में पांचवें स्थान पर रहना रहा। भारत 2010 में दिल्ली विश्व कप में आठवें और हेग में 2014 के विश्व कप में नौंवे स्थान पर रहा।

ओलंपिक चैंपियन अर्जेंटीना गोल मशीन गोंजालो पर निर्भर

ग्रुप ए: अर्जेंटीना,न्यूजीलैंड, स्पेन और फ्रांस  

अर्जेंटीना की टीम ने अब का विश्व कप में एकमात्र पदक  2014 में हेग में तीसरे स्थान पर रह कर कांसे के रूप में जीता था। जवाबी हमलों में माहिर ओलंपिक चैंपियन दुनिया की दूसरे नंबर की टीम अर्जेंटीना ओडिशा विश्व कप में भी पदक जीतने के लिए खतरनाक ड्रैग फ्लिकर गोलमशीन बन चुके गोंजालो पिलात पर निर्भर करेगी।  हालांकि अर्जेंटीना के पास मातियाज पारडेज और लुकस विला, ऑगस्टीन माजिली जैसे गोल करने और गोल के अभियान बनाने वाले आक्रामक मिडफील्डर हैं।

दुनिया की आठवें नंबर की टीम स्पेन जेवियर लियोनार्ट, सर्गेई एनरिक के साथ पाउ कुइमदा जैसे खिलाड़ियोंके बूते उलटफेर कर सकती है। न्यूजीलैंड की टीम में भारतीय मूल  के अरुण  पंछिया और शिया मैकलीज के साथ हयूगो इंगलिस और जैरड पंछिया जैसे स्ट्राइकर अपनी टीम को क्वॉर्टर फाइनल में पहुंचा सकते हैं।  फ्रांस जेनस्टेट बंधुओं- हयूगो और टॉम जैसे मिडफील्डरों और पेनल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ विक्टर चाल्र्स पर निर्भर करेगी। इसके बावजूद फ्रांस को कोई चमत्कार ही अंतिम आठ में पहुंचा सकता है।

'ग्रुप ऑफ डेथ' में नीदरलैंड को जर्मनी से सबसे कड़ी चुनौती

ग्रुप डी : नीदरलैंड, जर्मनी, मलयेशिया, पाकिस्तान

दुनिया की चौथे की नंबर की टीम नीदरलैंड की टीम को भले ग्रुप ऑफ  डेथ में होने के अपने ग्रुप डी में शीर्ष पर रहकर क्वॉर्टर फाइनल मे पहुंचने की सबसे मजबूत दावेदार है। अनुभवी ड्रैग फ्लिकर मिंक वान वीरडेन की नीदरलैंड  टीम में वापसी के साथ उसके पास जेरोम हर्टजबर्गर, मिर्को प्रुइजर,थियरे ब्रिंकमैन जैसे स्ट्राइकर और बिली बाकर जैसे मिडफील्डर उसका शुमार दुनिया की शीर्ष टीमों में कराते हैं।

नीदरलैंड को अपने ग्रुप में सबसे कड़ी चुनौती फ्लोरियन फुश्च, क्रिस्टोफर रुइर और मार्क ग्रैमबुच जैसे स्ट्राइकरों और मजबूत किलेबंदी में यकीन  करने वाली दुनिया की छठे नंबर की टीम जर्मनी  से मिलेगी। अपने जीवट से आधी अधूरी टीम के बावजूद भारत को भुवनेश्वर में हॉकी वर्ल्ड लीग  फाइनल्स में पिछले साल नाको चने चबाने वाली जर्मनी की टीम का जीवट किसी भी टीम के आगे बढने की राह का रोड़ा बन सकता है।

भारत के पूर्व कोच रोलैंट ओल्टमैंस के मार्गदर्शन में दुनिया की 12वें नंबर की टीम मलयेशिया फैज जलील ए फैजल सारी और फित्री सारी जैसे स्ट्राइकरों के तेज हमलों से दिन विशेष उलटफेर करने का दम  है। साथ में राजी रहीम जैसा ड्रैग फ्लिकर उसी तरह हारी बाजी जिता सकता है। तमाम विवादों और दबाव के बावजूद चार चैंपियन रही पाकिस्तान की टीम के दावे को कभी भी खारिज नहीं किया जा सकता है।

पाकिस्तान के पास रिजवान सीनियर के रूप में बेहतरीन स्कीमर, अली शान के रूप में बेहतरीन स्ट्राइकर और अलीम बिलाल और मुबाशिर अली जैसे ड्रैग फ्लिकर के रूप में कई तुरुप के इक्के  जरूर है लेकिन वह अंतिम 8 में तभी पहुंच सकता जब तकदीर कुछ साथ दे।

हॉकी विश्व कप में भारत के अब तक प्रदर्शन पर एक नजर

वर्ष         जगह                      कप्तान                स्थान  
1971     बार्सिलोना               अजित पाल सिंह         तीसरा  
1973     एम्सर्टडम                एम पी गणेश             दूसरा
1975     क्वालालंपुर              अजित पाल सिंह         पहला  
1978    ब्यूनर्स आयर्स            वी जे फिलिप्स           छठा  
1982    बॉम्बे (अब मुंबई)       सुरजीत सिंह              पांचवां
1986       लंदन                स्व.मोहम्मद शाहिद   12वां व अंतिम
1990       लाहौर                   परगट सिंह               दसवां  
1994       सिडनी                  जूड फेलिक्स            पांचवां
1998       उत्रेक्त                   धनराज पिल्लै           नौवां
2002     क्वालालंपुर               बलजीत ढिल्लों          दसवां
2006  मॉन्शेनग्लाडबाख           दिलीप टिर्की            ग्यारहवां
2010      दिल्ली                    राजपाल सिंह           आठवां  
2014       हेग                       सरदार सिंह             नौवां  

हॉकी विश्व कप में खिताब और पदक के लिहाज से सबसे कामयाब टीमें   
पाकिस्तान : चार (1971, 1978, 1982, 1994) बार खिताब, 2 (1975 और 1990) बार उपविजेता , 1 (1983) बार चौथा स्थान।
ऑस्ट्रेलिया : 3(1986, 2010, 2014) बार खिताब,    2(2002, 2006) बार उपविजेता,  4 (1978,1982, 1990, 1994)बार तीसरा स्थान, , 1 (1998) चौथा स्थान ।                 
नीदरलैंड :3 (1973, 1990,1998)  बार खिताब,    3(1978, 1994, 2014) बार उपविजेता,  2 (2002, 2010) बार तीसरा स्थान, 1 (1982) बार चौथा स्थान।  
जर्मनी : 2 (2002, 2006) बार खिताब, 2 (1982, 2010) उपविजेता, 4 (1973, 1975, 1986, 1998) बार तीसरा स्थान , 3 (1978, 1990, 1994) बार चौथा स्थान।  
भारत :1 (1975) बार खिताब, 1(1973) बार उपविजेता, 1 (1971) तीसरा स्थान।
स्पेन : 2 (1971, 1998) बार उपविजेता, 1 (2006) बार तीसरा स्थान।
इंग्लैंड : 1 (1986) बार दूसरा स्थान, 2 (2010, 2014) बार चौथा स्थान
अर्जेंटीना : 1 (2014) बार तीसरा स्थान।  
दक्षिण कोरिया : 2 (2002, 2006) बार चौथा स्थान।  
केन्या  (1971), मलयेशिया (1975) और तत्कालीन सोवियत संघ (1986) -तीनों को एक-एक बार चौथा स्थान  
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बतौर मेजबान नीदरलैंड को दो बार खिताब

अब तक कुल 9 देशों ने हॉकी विश्व कप की मेजबानी की  है। केवल नीदरलैंड(1973 अैर 1998) और जर्मनी (2006) ने ही बतौर मेजबान हॉकी विश्व कप खिताब जीता है। स्पेन (1971), इंग्लैंड (1986), और पाकिस्तान (1990) बतौर मेजबान उपविजेता रहे।ऑस्ट्रेलिया ने जब 1994 में सिडनी में विश्व कप की मेजबानी की तो तीसरे स्थान पर रहा।  

महाद्वीपों के लिहाज से हॉकी विश्व कप में प्रदर्शन  
एशिया महाद्वीप ने 5 बार-पाकिस्तान (4) और भारत (1)ने जीते विश्व कप हॉकी खिताब  
यूरोप महाद्वीप ने 5 बार -नीदरलैंड (3) और जर्मनी (2) ने जीते विश्व कप हॉकी खिताब
ओशनिया महाद्वीप के लिए 3 बार ऑस्ट्रेलिया ने जीते हॉकी विश्व कप खिताब  
अमेरिका  महाद्वीप मात्र 1 बार -अर्जेंटीना (2014 में हेग) में तीसरे स्थान पर रहा।
 अफ्रीका महाद्वीप ने मात्र 1 बार - केन्या (1971) में  चौथे स्थान पर रहा
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