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IND vs GBR: भारत ने मैच हारकर भी दिल जीता, रियो की गोल्ड मेडलिस्ट ब्रिटेन को कड़ी टक्कर दी, जानिए हार के 5 कारण

Fri, 06 Aug 2021 09:13 AM IST
अभिषेक दीक्षित स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

भारतीय महिला हॉकी टीम अपना पहला ओलंपिक पदक जीतने से चूक गई। ब्रिटेन ने महिला हॉकी में कांस्य पद जीता। हालांकि, शुरुआती तीन मैच हारकर टूर्नामेंट से बाहर होने की कगार पर आ चुकी टीम इंडिया का कांस्य पदक के मुकाबले तक पहुंचना उसके जज्बे को दिखाता है।
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भारतीय महिला हॉकी टीम - फोटो : ANI
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विस्तार
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ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम को कांस्य पदक के मुकाबले में ग्रेट ब्रिटेन के हाथों 3-4 से करारी हार का सामना करना पड़ा। गुरुवार को भारतीय पुरुष टीम ने जर्मनी को हराकर कांस्य पदक अपने नाम किया था। महिला टीम के पास भी आज इतिहास रचने का मौका था, लेकिन वह ऐसा करने में कामयाब नहीं हो पाई।

 

हालांकि, भारतीय टीम ने ब्रिटेन को कड़ी टक्कर दी। 2016 के रियो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली ग्रेट ब्रिटेन को भारत के खिलाफ मैच जीतने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। एक वक्त 3-2 पिछड़ रही ब्रिटेन आखिरी क्वार्टर में बढ़त बना पाई। इसलिए भारत मैच हारकर भी लोगों का दिल जीतने में कामयाब रहा। 

 

टीम इंडिया भले ही कांस्य पदक नहीं जीत पाई हो, लेकिन उसने टोक्यो में अपने अभियान का अंत चौथे स्थान पर रहकर किया। इससे पहले 1980 में भी भारतीय महिला हॉकी टीम चौथे स्थान पर रही थी। उस वक्त मुकाबले राउंड रोबिन आधार पर हुए थे और टॉप की दो टीमों के बीच फाइनल खेला गया था। 

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शुरुआत से ही ब्रिटेन को कड़ी चुनौती दी

कांस्य पदक के मुकाबले में शुरुआती 15 मिनट के खेल में भारतीय टीम अपनी लय पाने की कोशिश करती दिखी। इस वजह से टीम इंडिया खराब डिफेंस एक फिर सामने आया। इसका पूरा फायदा ब्रिटेन ने उठाया और 2-0 की बढ़त के साथ टीम इंडिया को दबाव में डाल दिया। 

इसके बाद टीम इंडिया ने शानदार वापसी की और हाफ टाइम में 3-2 की बढ़त के साथ ब्रिटेन को बैकफुट पर ला दिया। इसके बावजूद ब्रिटेन ने लगातार अपने अटैक के जरिए भारत की परीक्षा ली। यहीं, टीम इंडिया की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी जीत के रास्ते में रोड़ बन गई। आइए जानते हैं भारत की हार के 5 कारण...

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1. पहले क्वार्टर से ही डिफेंस कमजोर दिखा

पहले क्वार्टर में टीम इंडिया का कमजोर डिफेंस मुश्किलें खड़ी करता रहा। हालांकि, ग्रेट ब्रिटेन के खिलाड़ी इसका फायदा नहीं उठा सके। भारतीय खिलाड़ी की खराब डिफेंस का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पहले क्वार्टर में ब्रिटेन के खिलाड़ी भारतीय टीम के डी में बॉल पहुंचाने में कामयाब हो रहा था।

2. ब्रिटेन के अटैक का तोड़ नहीं निकाल पाए

पहले क्वार्टर के बाद ब्रिटेन ने अपना अटैकिंग खेल दिखाया और एक के बाद एक कई गोल शॉट लगाए। इस क्वार्टर के शुरू होने के तुरंत बाद 16वें मिनट में ब्रिटेन ने अपना पहला गोल किया। इससे पहले भारत इसे बराबर करने की कोशिश करता, ब्रिटेन ने 24वें मिनट में गोल दागकर अपनी बढ़त दोगुनी कर दी। जब भारत ने ब्रिटेन पर बढ़त ली, उसके बाद उनका अटैक और तेज हो गया। भारत के पास इस अटैक का कोई जवाब नहीं था और मुकाबला ब्रिटेन के पक्ष में रहा।

3. अहम मौकों पर पैनल्टी कॉर्नर पर स्कोर नहीं कर पाए

टीम इंडिया को मैच में वापसी करने के कई मौके मिले, लेकिन भारत उन्हें भुना नहीं पाया। इस मैच में भारत को कुल 8 पैनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन भारत सिर्फ 2 को गोल में तब्दील कर पाया। मैच में तब 8 मिनट बचे थे, तब भारत को ब्रिटेन की बराबरी का मौका मिला था, लेकिन टीम पैनल्टी कॉर्नर को स्कोर में बदलने में कामयाब नहीं हो सकी।

4. अटैक करने में पीछे रही टीम

ग्रेट ब्रिटेन के सामने भारत का अटैक फीका नजर आया। टीम इंडिया ज्यादातर ब्रिटेन के प्रहारों को बचाने का प्रयास करती नजर आई। इसकी अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ब्रिटेन के मुकाबले आधे गोल शॉट ही लगाए। ब्रिटेन ने मैच में कुल 19 गोल शॉट लगाए, जबकि भारत की ओर से सिर्फ 11 गोल शॉट लगे।
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5. सविता पुनिया को टीम का साथ नहीं मिला

भारत की ओर डिफेंस का जिम्मा एक बार सिर्फ गोलकीपर सविता पुनिया के कंधों पर रहा। सविता ने 11 गोल शॉट में से 7 का बचाव किया। उन्होंने दीवार की तरह ब्रिटेन के अटैक का सामना किया, लेकिन उन्हें किसी और डिफेंडर का साथ नहीं मिला। टीम इंडिया को इसी का खामियाजा हार के साथ चुकाना पड़ा।
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