जब हमारा देश गुलाम था तब दुनिया में भारत की पहचान गांधी, हॉकी और ध्यानचंद की वजह से होती थी। लेकिन आजाद भारत में हॉकी और ध्यानचंद हमेशा से उपेक्षित रहे। हॉकी और उसके जादूगर पर देश और उसकी सरकार का ध्यान नहीं गया। फुटबॉल के साथ जिस तरह पेले और मुक्कबाजी के साथ मोहम्मद अली का नाम जुड़ा है उसी तरह हॉकी से ध्यानचंद जुड़े हैं।
मेरे लिए एक आंसू भी नहीं निकलेंगे
मेजर ध्यानचंद
ध्यानचंद को शायद अपनी उपेक्षा का अंदाजा हो गया था। तभी तो उन्होंने अपने अंतिम साक्षात्कार में कहा था कि जब मेरा निधन होगा तो पूरा विश्व रो रहा होगा लेकिन भारत के लोगों की आंखों से मेरे लिए एक आंसू भी नहीं निकलेंगे। मैं अपने देश के लोगों को अच्छी तरह जानता हूं।
मुझे भारत सबसे अच्छा लगता है, मुझे कुछ नहीं चाहिए
मेजर ध्यानचंद
क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर से पहले ध्यानचंद को भारत रत्न मिलना भी एक तरह का नया विवाद है। सचिन तेंदुलकर को इसमें कतई दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने क्रिकेट के जरिए देश की बहुत सेवा की है। लेकिन सरकार को उनको भारत रत्न देने की घोषणा करने से पहले ध्यानचंद और उनके हॉकी के योगदान पर जरूर सोचना चाहिए था। यह वहीं ध्यानचंद थे जिन्होंने हिटलर का ऑफर यह कहकर ठुकरा दिया था कि मुझे मेरा देश भारत सबसे अच्छा लगता है, मुझे कुछ नहीं चाहिए। हॉकी की जादूगरी को देखते हुए हिटलर ने ध्यानचंद को जर्मनी में सेना में सर्वोच्च पद देने की पेशकश की थी।
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ब्रिटिश साम्राज्य ध्यानचंद से डरता था
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क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर से बड़ा नाम डान ब्रैडमैन का है। लेकिन हॉकी में ध्यानचंद से आगे दुनिया में कोई नहीं था। इसके बाद भी भारत रत्न में ध्यानचंद यानी दद्दा की अनदेखी हॉकी प्रेमी जनता को निराश कर सकती है। भारत जब गुलाम था तो अंग्रेज सभी भारतीयों को धमका कर रखते थे। लेकिन ब्रिटिश साम्राज्य ध्यानचंद से डरता था। लिहाजा 1936 के बर्लिन ओलंपिक में ब्रिटेन ने ध्यानचंद के डर से अपनी टीम ही मैदान में नहीं उतारी।
उनके जन्मदिन को खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है
ध्यानचंद
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ध्यानचंद को दुनिया में लगभग 55 देशों के 400 से अधिक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। उनके जन्मदिन को देश में खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसके बाद भी उन्हें भारत रत्न देने के लिए सरकार को विचार करना पड़ता है। ऐसी स्थिति का ध्यानचंद को शायद बहुत पहले ही एहसास हो गया था। तभी तो उन्होंने अंतिम साक्षात्कार में कहा, 'मैं अपने देश को अच्छी तरह जानता हूं'।
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