सूत्रों ने बताया कि प्रतिबंध थोड़े समय के लिए ही हो सकता है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय से नियुक्त प्रशासकों की समिति चुनावों और नए संविधान को लेकर फीफा की लगभग सभी शर्तों को मानने के लिए तैयार है। इसलिए अंडर-17 महिला विश्वकप का आयोजन अभी भारत में हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में मामले पर बुधवार को सुनवाई होगी
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सीओए की ओर से 28 अगस्त को चुनाव तय किया गया था, जिसकी प्रक्रिया 13 अगस्त से शुरू की जा चुकी है। सीओए ने चुनाव के लिए रिटर्निंग आफिसर और मतदाता सूची तैयार कर ली है। सूत्रों कें अनुसार अब चुनाव 28 अगस्त को नहीं लेकिन फीफा की तय समय सीमा 15 सितंबर से पहले कराए जाएंगे। सीओए फीफा की शर्तों के अनुसार चुनाव कराने पर सहमत है। ऐसी स्थिति में फीफा अंडर-17 महिला विश्वकप की मेजबानी भी बचाई जा सकती है।
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पता चला है कि सीओए को अभी फीफा के प्रतिबंध की उम्मीद नहीं थी, क्योंकि वह विश्व संस्था की जरूरतों के अनुसार आगे बढ़ने के लिए तैयार थे। भारतीय फुटबॉल समुदाय को बुधवार को उच्चतम न्यायालय में होने वाली सुनवाई के फैसले का इंतजार है। सूत्रों ने बताया कि सीओए, फीफा और खेल मंत्रालय राज्य संघों के प्रतिनिधियों से बने निर्वाचक मंडल के साथ एआईएफएफ के चुनाव कराने पर सहमत हैं।
फीफा ने एआईएफएफ को सस्पेंड किया
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अब इन चुनावों के निर्वाचक मंडल में 36 प्रख्यात खिलाड़ियों को शामिल नहीं किया जाएगा। इससे पहले निर्वाचन अधिकारी ने जिन 36 खिलाड़ियों की सूची जारी की थी उनमें शब्बीर अली, मनोरंजन भट्टाचार्य, प्रशांत बनर्जी, आईएम विजयन और बाईचुंग भूटिया भी शामिल हैं। पांच प्रतिष्ठित खिलाड़ी (तीन पुरुष और दो महिला) हालांकि, प्रस्तावित 22 सदस्यीय कार्यकारी समिति के सदस्य बन सकते हैं और उन्हें मतदान का अधिकार होगा।