यूक्रेन पर हमला कर रूस ने अपने खेल की स्थिति को खतरे में डाल दिया है। दुनिया के कई खेल महासंघ ने हमले के विरोध में रूस को कई खेल स्पर्धाओं से बाहर कर दिया गया है। इसमें स्कीइंग, कर्लिंग, फॉर्मूला वन जैसे प्रारूप शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी ने भी आयोजकों को किसी भी अंतरराष्ट्रीय इवेंट में रूस के खिलाड़ियों को भाग नहीं लेने देने को निर्णय सुनाया है। इसके अलावा फीफा भी रूस को बैन करने पर बैठक कर रहा है।
वहीं, यूरोप की फुटबॉल गवर्निंग बॉडी यूएफा ने सबसे बड़ा फैसला लेते हुए 28 मई को होने वाले चैंपियंस लीग फाइनल का आयोजन सेंट पीटर्सबर्ग से स्थानांतरित कर पेरिस कर दिया है। इंटरनेशनल बायथलॉन यूनियन ने भी रूस को अपने आयोजनों से प्रतिबंधित कर दिया है। उधर, अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने भी रूस की कड़ी निंदा की है।
इस मसले पर अर्थशास्त्र के प्रोफेसर विक्टर ए कहते हैं, सोची शीतकालीन ओलंपिक (2014) की मेजबानी के लिए रूस ने 50 बिलियन डॉलर से अधिक का खर्च किया था। वहीं, यूएफा के चैंपियंस लीग आयोजन बदलने के फैसले से रूस को करीब लाखों मिलियन डॉलर का नुकसान होने की संभावना है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि रूस के राष्ट्रपति इसको लेकर कितने गंभीर हैं।
आने वाले समय में होने वाले खेल आयोजन
अगले महीने कई सारे खेल का आयोजन होना है। इसमें विश्व फिगर स्केटिंग चैंपियनशिप, विश्व कप फुटबॉल क्वालीफाइंग और जुलाई में होने वाला ट्रैक एंड फील्ड चैंपियनशिप आयोजन शामिल हैं। आईओसी ने रूस की कड़ी निंदा तो की है, लेकिन उसके लिए कड़ी परीक्षा यह होगी कि वह 2024 में होने वाले पेरिस ओलंपिक में रूस पर क्या फैसला लेता है।