भारतीय महिला पैरा एथलीट दीप्ति जीवांजी ने महिला 400 मीटर टी20 वर्ग में कांस्य पदक जीता। दीप्ति ने फाइनल में 55.82 सेकेंड का समय लिया और उनका रिएक्शन टाइम 0.164 सेकेंड रहा। इस तरह दीप्ति तीसरे स्थान पर रहीं। भारत ने इस तरह पेरिस पैरालंपिक में 16वां पदक जीता। यह मंगलवार को भारत का पहला पदक रहा। इससे पहले भारत ने सोमवार को कुल आठ पदक अपने नाम किए थे।
इसी महीने 21 बरस की होने वाली दीप्ति यूक्रेन की यूलिया शुलियार (55.16 सेकेंड) और विश्व रिकॉर्ड धारक तुर्किये की आयसेल ओंडर (55.23 सेकेंड) के बाद तीसरे स्थान पर रहीं। टी20 श्रेणी बौद्धिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों के लिए है।
विश्व पैरा एथलेटिक्स में जीता था स्वर्ण पदक
दीप्ति ने पैरा एशियन गेम्स और विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। वह फाइनल में स्वर्ण पदक विजेता एथलीट से 0.66 सेकेंड पीछे रहीं। दीप्ति से पहले भारत के लिए प्रीति पाल ने महिला 100 मीटर और 200 मीटर टी35 स्पर्धा में कांस्य पदक जीते थे। दीप्ति ने इसी साल मई में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर टी20 स्प्रिंट में 55.07 सेकेंड का विश्व रिकॉर्ड बनाया था और स्वर्ण अपने नाम करने में सफल रही थीं। इसी के साथ उन्होंने पेरिस पैरालंपिक के लिए भी क्वालिफाई कर लिया था। हालांकि, उनका रिकॉर्ड रजत पदक विजेता एसेल ने तोड़ा जिन्होंने 54.96 सेकेंड का समय लिया था।
गरीबी में बिताया बचपन, माता-पिता के समर्थन से बढ़ीं आगे
तेलंगाना के वारंगल जिले के कलेडा गांव में जन्मीं दीप्ति ने पैरा स्पोर्ट्स की दुनिया में उल्लेखनीय प्रभाव डाला है। बौद्धिक दुर्बलता और गरीबी सहित कई चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, दीप्ति एक विश्व रिकॉर्ड धारक और कई लोगों के लिए प्रेरणा की किरण बन गई हैं। दीप्ति का प्रारंभिक जीवन वित्तीय संघर्षों और सामाजिक पूर्वाग्रहों से भरा था। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर थे, जिन्हें गुजारा चलाने के लिए अपनी जमीन भी बेचनी पड़ी थी। दीप्ति की बौद्धिक दुर्बलता के कारण शुरू में उनका उपहास उड़ाया गया। हालांकि, दीप्ति माता-पिता उसके साथ खड़े रहे और उनके समर्थन ने दीप्ति की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।