पीवी सिंधु भारत की पहली बैडमिंटन खिलाड़ी हैं जिन्होंने ओलंपिक में दो पदक जीते हैं। बीते रविवार (1 अगस्त) को सिंधु ने ही बिंग जियाओ को हराकर कांस्य पदक जीता था। इस मुकाबले में उन्होंने चीनी खिलाडी जियाओ को 21-13, 21-15 से शिकस्त दी। बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की तरफ से आयोजित की गई वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांस्य पदक विजेता सिंधु ने कहा, वास्तव में मैं देश के लिए पदक जीतकर बहुत खुश हूं मैं अपने आपको गौरवान्ति महसूस कर रही हूं, यह लगातार दूसरा ओलंपिक मेडल है, रियो में रजत पदक जीता और य़हां टोक्यो में कांस्य, इस उपलब्धि से मैं बहुत खुश हूं।
सिंधु ने आगे कहा, मैं सेमीफाइनल मैच हारने के बाद थोड़ा निराश थी, मेरे कोच और फीजियो ने मुझसे कहा कि अभी सफर खत्म नहीं हुआ है, सेमीफाइनल के बाद मेरी मेरी मिश्रित भावनाएं थीं, मुझे दुखी होना चाहिए या मुझे खुश होने के लिए दूसरा मौका मिलना चाहिए। जिस दिन मेरा कांस्य पदक के लिए मुकाबला होना था मैं सुबह जागी और मैंने अपने आप में सोचा कि आज मुझे सबसे अच्छा करना है, देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतने बड़ी बात है।
इस दौरान जब उनसे यह पूछा गया कि ब्रांज मेडल के लिए होने वाले मुकाबले से पहले कोच से क्या बात हुई। इस सवाल के जवाब में सिंधु ने कहा, सेमीफाइनल में हारने के बाद मैं दुखी थी, हम सबकी आंखों में आंसू थे, मेरे कोच पार्क ताइ सैंग और फीजियो ने हौसला बढ़ाया। उन्होंने मुझसे कहा जाओ अब सिर्फ एक और मैच है, उन्होंने कहा मैं दुखी नहीं हो सकती। कोच मुझसे कह रहे थे और मैं तैयारी कर रही थी। कोच ने कहा था कि कांस्य पदक और चौथे स्थान में बहुत बड़ा अंतर होता है। सिंधु के कांस्य पदक जीतने के बाद कोच पार्क ताइ सैंग ने भी खुशी जाहिर की। पार्क ने कहा कि मैं वास्तव में बहुत खुश हूं कि मेरे कोचिंग करियर में यह पहली बार है जब मेरे खिलाड़ी ने पदक जीता। पार्क के मुताबिक सिंधु की इस उपलब्धि से मैं बहुत खुश हूं।