फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Tulsidas Jayanti 2021: तुलसीदास के इन दोहों से मिलती है गहरी सीख

Sun, 15 Aug 2021 06:45 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तुलसीदास जी हिन्दी साहित्य के एक महान कवि थे, जिन्होंने रामचरित मानस जैसे महाकाव्य की रचना की। इस रचना ने उन्हें अमर कर दिया। उनके द्वारा रचित दोहे भी व्यक्ति एवं समाज को अच्छे संदेश देते हैं। 
विज्ञापन
तुलसीदास जयंती 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आज तुलसीदास जयंती है। हर साल तुलसीदास जयंती श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन मनाई जाती है। तुलसीदास जी हिन्दी साहित्य के एक महान कवि थे, जिन्होंने रामचरित मानस जैसे महाकाव्य की रचना की। इस रचना ने उन्हें अमर कर दिया। कहते हैं कि तुलसीदास जी को भगवान श्रीराम जी के साक्षात दर्शन हुए थे। श्रीराम जी से उनकी भेंट हनुमान जी की कृपा से हुई थी। बचपन से ही तुलसीदास जी अभागे थे। ब्राह्मण परिवार में जन्मे तुलसी की माता का देवहासन उनके बचपन में ही हो गया था। शादी के बाद पत्नी के दुत्कार के बाद वे प्रभुराम की भक्ति में लीन हो गए। उन्होंने अपनी साहित्यिक कला से कई रचनाएं रचीं। रामचरित मानस के साथ-साथ उनके दोहे भी जन-जन की जुबां पर आज भी हैं। उनके दोहों ने व्यक्ति एवं समाज को अच्छे संदेश दिए हैं। उनके दोहों से अच्छी सीख मिलती हैं-  

विज्ञापन

 

तुलसी साथी विपत्ति के विद्या विनय विवेक ।
साहस सुकृति सुसत्यव्रत राम भरोसे एक ।


अर्थ-  गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं, विपत्ति के समय में आपको घबराकर हार नहीं माननी चाहिए। ऐसी स्थिति में आपको अपने अच्छे कर्म, सही विवेक और बुद्धि से काम लेना चाहिए। मुश्किल समय में साहस और अच्छे कर्म ही आपका साथ देते हैं। 

राम नाम  मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार।
तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर। 


अर्थ- तुलसीदास जी कहते है अगर आप अपने चारों तरफ खुशहाली चाहते हैं तो अपने वाणी पर काबू रखें। गलत शब्द बोलने की जगह राम नाम जपते रहिए इससे आप भी खुश रहेंगे और आपके घरवाले भी खुश रहेंगे।

विज्ञापन

 

नामु राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु। 
जो सिमरत भयो भाँग ते तुलसी तुलसीदास। 


अर्थ- राम का नाम लेने से आपका मन साफ रहता है। किसी भी काम को करने से पहले राम का नाम लीजिए। तुलसीदास जी भी राम का नाम लेते-लेते अपने आप को तुलसी के पौधे जैसा पवित्र मानने लगे थे।
 

तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर।
सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि। 


अर्थ-तुलसी दास जी कहते हैं सुंदर रूप देखकर न सिर्फ मूर्ख बल्कि चतुर इंसान भी धोखा खा जाते हैं। जैसे मोर दिखने में बहुत सुंदर लगते हैं लेकिन उनका भोजन सांप है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें