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Chanakya Niti: इन सात सूत्रों में छिपा है विद्यार्थियों की सफलता का मूलमंत्र

Tue, 22 Feb 2022 07:33 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Chanakya Niti:आचार्य चाणक्य का मानना था कि विद्यार्थी जीवन एक तप के समान होता है। विद्यार्थियों के जीवन पर परिवार के साथ-साथ आसपास का परिवेश और शिक्षा का प्रभाव जरूर पड़ता है। 
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Chanakya Neeti: आचार्य चाणक्य का मानना था कि विद्यार्थी जीवन एक तप के समान होता है। - फोटो : amar ujala
Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य अपने समय में महानतम शिक्षकों में से एक थे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गुप्त शासनकाल के दौरान वे चंद्रगुप्त के महामंत्री थे। आचार्य चाणक्य बहुत ही दूरदर्शी और महान रणनीतिकार थे। उन्होंने चाणक्य नीति जैसा महान ग्रंथ लिखा है, जिसमें लोक कल्याण की बातें सूत्रों के रूप में निहित हैं। यदि कोई व्यक्ति चाणक्य नीति में बताई गई बातों का पालन करता है तो वह अपने जीवन को सफल बना सकता है। आचार्य चाणक्य का मानना था कि विद्यार्थी जीवन एक तप के समान होता है। विद्यार्थियों के जीवन पर परिवार के साथ-साथ आसपास का परिवेश और शिक्षा का प्रभाव जरूर पड़ता है, लेकिन कई बार यदि उनके आसपास का माहौल बेहतर नहीं है और फिर भी यदि विद्यार्थियों अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं और इसके पीछे सात सूत्र काम करते हैं। इन सात सूत्रों के बारे में चाणक्य ने अपनी नीति में विस्तार से बताया है।
 
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Chanakya Neeti: विद्यार्थी को अपने क्रोध को काबू में रखने का प्रयास करना चाहिए। - फोटो : istock
क्रोध पर नियंत्रण
चाणक्य नीति के अनुसार जो विद्यार्थी अपने क्रोध पर काबू नहीं कर सकता, वह ज्ञान हो कर भी अज्ञानी के समान होता है। क्योंकि जब वह क्रोध में होता है तो उसके सोचने समझने की शक्ति कम हो काटी है, इसलिए विद्यार्थी को अपने क्रोध को काबू में रखने का प्रयास करना चाहिए।
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Chanakya Neeti: विद्यार्थियों के अंदर लोभ यानी लालच की भावना नहीं होनी चाहिए। - फोटो : istock
न हो लोभ की भावना 
लालच व्यक्ति को बुरे कर्म की ओर धकेलता है और यदि लालच मनुष्य के मन में घर कर जाए तो वह इसमें गिरता चल जाता है। इसलिए विद्यार्थियों के अंदर लोभ यानी लालच की भावना नहीं होनी चाहिए। इस पर नियंत्रण रखना हर विद्यार्थी के लिए जरूरी है। विद्यार्थियों के मन में सिर्फ एक लालच होना चाहिए और वो है ज्ञान अर्जन का।

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Chanakya Neeti: विद्यार्थियों को सादा भोजन ही करना चाहिए। - फोटो : istock
स्वाद पर नियंत्रण 
आचार्य चाणक्य के अनुसार विद्यार्थियों को ऐसा भोजन करना चाहिए जो उन्हें अच्छे स्वास्थ्य के साथ बुद्धि विकास में भी मदद करे। जिन छात्रों को जिह्वा का स्वाद लग जाता है उसका पढ़ने-लिखने में मन नहीं लग सकता।  इसलिए विद्यार्थियों को सादा भोजन ही करना चाहिए।
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Chanakya Neeti: विद्यार्थी जीवन में छात्रों को शृंगार आदि से दूर रहना चाहिए। - फोटो : istock
श्रृंगार से रहे दूर
आचार्य चाणक्य के अनुसार विद्यार्थी जीवन में छात्रों को शृंगार आदि से दूर रहना चाहिए। क्योंकि जो बच्चे सिर्फ सजने संवरने में मन लगाएंगे उनका मन पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लगेगा। 
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Chanakya Neeti: विद्यार्थी को अपनी सीमा में रहकर ही हंसी-मजाक करना चाहिए। - फोटो : istock
हास-परिहास से रहें दूर
आचार्य चाणक्य के अनुसार जो छात्र ज्यादा हंसी मजाक करते हैं तो ऐसे में पढ़ाई को एक तरफ कर देते हैं। कई बार ज्यादा हंसी-मजाक कई बार मतभेद भी उत्पन्न होते हैं। विद्यार्थी को अपनी सीमा में रहकर ही हंसी-मजाक करना चाहिए।
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Chanakya Neeti: जो विद्यार्थी नींद पर नियंत्रण नहीं कर सकता, वह अपने ज्ञान और अनुभव के बाद भी सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। - फोटो : istock
नींद पर नियंत्रण
चाणक्य नीति के अनुसार जो विद्यार्थी नींद पर नियंत्रण नहीं कर सकता, वह अपने ज्ञान और अनुभव के बाद भी सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। इसलिए सही समय पर जागना और सही समय पर सोने के साथ ही नींद पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। 
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Chanakya Neeti: विद्यार्थियों को काम वासना से दूर रहना चाहिए। - फोटो : istock
काम-वासना से दूर 
चाणक्य नीति के अनुसार जो विद्यार्थी काम वासना में लिप्त हो जाता है वह जीवन में कभी भी सफलता प्राप्त नहीं कर पाता। विद्यार्थियों को काम वासना से दूर रहना आना चाहिए।
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