साधना का मकसद कहीं पहुंचना नहीं है। मकसद सिर्फ इतना है कि आप बस वर्तमान में स्थिर रह सकें। जो यहां है, वही हर जगह है, जो यहां नहीं है, वह कहीं नहीं है। सब कुछ यहीं, और इसी पल में है। अगर आप जिंदा हैं तो यहीं हैं, अगर आप मर जाते हैं, तो यहीं हैं।
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यही वजह है कि जो लोग साधना में डूबे हुए हैं, वे कोई खास अनुभव नहीं पाना चाहते। अगर आप पूरी दुनिया की सैर करने निकलेंगे तब भी आप यह नहीं जान पाएंगे कि दुनिया गोल है या चपटी। साधना आपको समझदारी की ऐसी स्तर तक लाती है कि आपको इससे कोई अंतर नहीं पड़ता कि आप क्या कर रहे हैं। आप पहाड़ की चोटी पर हैं या किसी घाटी में, आप दुनिया में कामयाब हैं या नहीं, – आप हर हाल में, हर चीज को एक ही भाव से देखते हैं।
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यह कोई जाल नहीं है, यह जीवन की खूबसूरती है। वास्तव में कहीं नहीं जाना है। आप बस यहीं बैठे-बैठे आनंद में मगन हो सकते हैं, और यहीं बैठे-बैठे आप बेहद दुखी भी हो सकते हैं।
आपके पास सभी तरह के विकल्प हैं। जीवन ने आपके ऊपर कोई बंधन नहीं लगाया है। बंधन तो आपने खुद गढ़े हैं। इस अस्तित्व ने तो आपको स्वतंत्र छोड़ा है, पूरी तरह से स्वतंत्र। बिना कुछ बनें भी आप जीवन को पूरे आनंद में जी सकते हैं।