कई बार हम मनुष्य जानते बूझते हुए ऐसी गलती करते हैं जो धर्म विरूद्ध होता है। हमें लगता है कि हम जो काम कर रहे हैं उसे कोई देख नहीं रहा है। जबकि सच यह है कि हम पर चौबीस घंटे यमराज के गुप्तचर की नजर रहती है।
हम यह बात उस पुराण के आधार पर कह रहे हैं जिसमें भगवान विष्णु ने गरूड़ को मृत्यु के बाद की स्थितियों को बतया है। इस पुराण का नाम है गरूड़ पुराण। इस पुराण में बतया गया है कि जब मृत्यु के बाद यमराज के सामने यमदूत आत्मा को लेकर पहुंचते हैं तब यमराज अपने सहयोगी चित्रगुप्त से व्यक्ति के कर्मों का लेखा जोखा बताने के लिए कहते हैं।
जब पति ग्यारहवीं संतान और पत्नी बेटी बन जाए
यमराज की आज्ञा मिलने पर चित्रगुप्त गुप्तचर को बुलाते हैं। गुरूड़ पुराण मे यमदूत के गुप्तचर का नाम श्रवण बताया गया है। इनकी पत्नी का नाम श्रवणी है। यह ब्रह्मा के पुत्र हैं। दोनों धरती, आकाश और पाताल में विचारण करते रहते हैं। व्यक्त जो भी कर्म करते हैं उन्हें यह दूर से देख और सुन लेते हैं।
पिछले अंक में, यमलोक के रास्ते में भयानक नदी
पुरूषों के कर्म को श्रवण देखते हैं और स्त्रियों के कर्मों को श्रवणी देखती हैं। यह यमराज को व्यक्ति के पाप और पुण्यों की जानकारी देते। इनके द्वारा दी गयी जानकारी की पुष्टि सूर्य, चन्द्र, अनल, वायु, दोनों संध्याएं करती हैं। इसके बाद चित्रगुप्त से विचार-विमर्श करके यमराज व्यक्ति को दंड देते हैं।
अगले अंक में यमराज के दरबार में चलकर देखेंगे कि वहां कैसे दंड दिया जाता है