सावन 2021: शिव परिवार एकता का प्रतीक है।
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श्रद्धा और समर्पण भाव से शिव की उपासना करने से शिवत्व तो जागृत होता ही है। साथ में शिव तत्व की प्राप्ति भी होती है और यहीं से हमें जीवन में एकता और सन्तुलन की सीख भी मिलती है। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि देवाधिदेव भगवान शिव के परिवार में यह देखने को मिलता है कि उनके परिवार में जितने वाहन हैं जैसे भगवान शंकर गले में सर्प धारण करते हैं। उनके पुत्र गणेश का वाहन चूहा है। सर्प और चूहा एक दूसरे के शत्रु होते हुए भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। भगवान कार्तिकेय का वाहन मोर है, जो कि सर्प का भक्षण करता है, लेकिन दोनों आपस में प्रेम से रहते हैं। भगवान शिव का वाहन बैल है, जबकि माता पार्वती का वाहन शेर है। दोनों एक दूसरे के दुश्मन होते हुए आपस में मिलजुलकर रहते हैं।
भगवान शिव के परिवार में रहन-सहन और खानपान में काफी विषमताओं के बावजूद भी सभी प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना से रहते हैं और इन सभी की परस्पर आपस में शत्रुता है लेकिन फिर भी इनके बीच में कभी कोई लड़ाई छिड़ी हो ऐसा नहीं हुआ। क्योंकि देवताओं के जो प्रतीकात्मक पशु वाहन हैं वे शत्रुता के बीच मित्रता का भाव जाग्रत करते हैं और अपने स्वभाव अपनी प्रवृति को छोड़े बिना सभी से मिलजुलकर रहते हैं।
सामाजिक तौर पर देखें तो परिवारों में भी यह जरूरी है अलग-अलग विचारों, अभिरूचियों, स्वभावों के बावजूद हम लोग हिलमिल कर रहें अपनी सोच दूसरों पर न थोपी जाय और सबसे खास बात यह कि मुखिया और अन्य बड़े सदस्यों के गले में गरल थामें रखने का धीरज और सबको साथ लेकर चलने की आदत हो तभी संयुक्त परिवार चल सकते हैं। यह बात हमारे परिवार तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए वरन् हमारे देश में विभिन्न धर्मो, जाति और विविधताओं के बीच एकता व संतुलन शिव परिवार की तरह जरूरी है।
सर्वमान्य और सर्वोचित निर्णय ठण्डे दिमाग से ही लिए जा सकते हैं। महाशिव के मस्तक पर चन्द्रमा और गंगा का होना इस बात का संकेत है कि मस्तिष्क को सदा शीतल रखो। चन्द्रमा और गंगाजल दोनों में असीम शीतलता है।
मानव मात्र को भगवान शिव यह संदेश देते हैं कि भले ही हमारा स्वाभाव और प्रकृति भिन्न हों पर हमें परस्पर मिल कर रहना चाहिए।