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आज श्रावण पूर्णिमा के दिन जरूर सुनें सत्यनारायण भगवान की कथा, यहां जानें संपूर्ण कथा विधि

Mon, 19 Aug 2024 06:18 AM IST
शिखर बरनवाल ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

इस साल श्रावण मास की पूर्णिमा 19 अगस्त 2024 को यानी कल मनाया जाएगा। बता दें कि सावन महीने के पूर्णिमा को ही रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन कथा सुनने का विशेष महत्व होता है।
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सत्यनारायण - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Satyanarayan Katha Vidhi: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास में सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना शुभ होता है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में सावन के महीने में कम से कम एक बार सत्यनारायण की कथा सुना जाता है। इस दिन घर के सभी लोग एक साथ बैठकर सत्यनारायण भगवान की पूजा करते हैं और कथा सुनने के बाद सभी लोगों में प्रसाद बांटते हैं। वैसे तो इस कथा को श्रावण मास के किसी भी दिन सुना जाता है मगर ज्यादातर लोग श्रावण की पूर्णिमा के दिन इस कथा को सुनते हैं। इस साल श्रावण मास की पूर्णिमा 19 अगस्त 2024 को यानी कल मनाया जाएगा। बता दें कि सावन महीने के पूर्णिमा को ही रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन कथा सुनने का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन कथा सुनने का विशेष फल मिलता है। इसलिए आइए इस लेख में से जानते हैं कि सत्यनारायण भगवान की कथा कैसे सुना जाता है, साथ ही जानेंगे की इसकी पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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सत्यनारायण - फोटो : iStock
सत्यनारायण भगवान की पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य क्रियाओं से मुक्त होकर पवित्र स्नान करें। अपने घर और मंदिर को अच्छे साफ करें। इसके बाद सूर्यदेव को अर्ध्य दें। अपने आंगन में सत्यनारायण भगवान की रंगोली बनाएं। अब एक लकड़ी की चौकी और पीला कपड़ा बिछाकर भगवान सत्यनारायण की प्रतिमा स्थापित करें। अब परिवार के ही किसी जानकार से सत्यनारायण की कथा का वाचन करवाएं और सभी लोग हाथ जोड़कर बैठकर सुनें। अब गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। हल्दी या चंदन का तिलक लगाएं। पीले फूलों की माला अर्पित करें। इसके बाद हवन करें। अब अंत में भगवान सत्यनारायण की आरती करें। भोग में चढ़े प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों को बाटें।
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सत्यनारायण - फोटो : iStock
पूजन सामग्री
सत्यनारायण भगवान की पूजा में पान सुपारी, दही अक्षत, हल्दी, लाल सिंदूर, पीला सिंदूर, कलश, दिया, बछड़ी का गोबर(गौरी गणेश की प्रतिमा स्थापित करने के लिए), भोग के लिए पंचामृत, आटे की पंजीरी, फल, रक्षा सूत्र, हवन सामग्री, गुड़, चीनी आदि पूजन सामग्री की जरूरत होती है।

श्री सत्यनारायण मंत्र
ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः
शर्करास्नानं समर्पयामि
शर्करा स्नानान्ते पुनः शुद्धोदक स्नानं समर्पयामि

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।  
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