फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Som Pradosh Vrat 2022: सोम प्रदोष व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा- विधि और महत्व

Mon, 21 Nov 2022 07:54 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सप्ताह के जिस दिन त्रयोदशी तिथि होती है, उसी के आधार पर प्रदोष व्रत का नाम भी पड़ता है।  शास्त्रों में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष में सोमवार को पड़ रहा है।
विज्ञापन
मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष में सोमवार को पड़ रहा है। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Som Pradosh Vrat November 2022:  हर माह में दो बार त्रयोदशी तिथि पड़ती है। एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। त्रयोदशी तिथि भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। सप्ताह के जिस दिन त्रयोदशी तिथि होती है, उसी के आधार पर प्रदोष व्रत का नाम भी पड़ता है।  शास्त्रों में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष में सोमवार को पड़ रहा है। इस कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं। सोम प्रदोष के दिन ही कुछ विशेष योग भी बन रहे हैं। आइए जानते हैं प्रदोष की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व। 
विज्ञापन

Kaal Bhairav Jayanti 2022: कब है काल भैरव जयंती? जानिए तिथि और महाकाल को प्रसन्न करने के उपाय
 

मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष में सोमवार को पड़ रहा है। - फोटो : iStock
सोम प्रदोष व्रत तिथि
मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि आरंभ:   21 नवंबर, सोमवार, प्रातः 10: 06 मिनट पर 
मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि समाप्त:  22 नवंबर, मंगलवार, प्रातः 08:48 मिनट पर 
प्रदोष व्रत की पूजा सायंकाल में की जाती है, इसलिए सोम प्रदोष व्रत 21 नवंबर को रखा जाएगा।

मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष में सोमवार को पड़ रहा है। - फोटो : iStock
शुभ मुहूर्त 
प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त आरंभ: 21 नवंबर, सायं 5:24 मिनट से 
प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त समाप्त: 21 नवंबर, रात्रि 08:05 मिनट पर 

मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष में सोमवार को पड़ रहा है। - फोटो : iStock
शुभ योग 
प्रदोष व्रत के दिन सुबह से लेकर रात 09 बजकर 06 मिनट तक आयुष्मान योग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस योग में पूजा करने का दोगुना फल प्राप्त होता है। 

मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष में सोमवार को पड़ रहा है। - फोटो : अमर उजाला।
सोम प्रदोष की पूजा विधि
  • सोम प्रदोष के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत होकर साफ सुथरे वस्त्र धारण करें। 
  • अब एक चौकी रखें और उस पर भगवान शिव और माता पार्वती का चित्र या कोई मूर्ति स्थापित करें। 
  • इसके बाद षोडशोपचार पूजन करें। 
  • संध्या के समय पुनः स्नान के बाद शुभ मुहूर्त में पूजन आरंभ करें। 
  • गाय के दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें। 
  • फिर शिवलिंग पर श्वेत चंदन लगाकर बेलपत्र, मदार, पुष्प, भांग, आदि अर्पित करें। 
  • इसके बाद विधि पूर्वक पूजन और आरती करें। 
विज्ञापन

मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष में सोमवार को पड़ रहा है। - फोटो : iStock
सोम प्रदोष का महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार सोम प्रदोष व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष या ग्रहण दोष है उन्हें सोम प्रदोष का व्रत जरूर रखना चाहिए। प्रदोष व्रत रखने और शिव पूजा करने से रोग, ग्रह दोष, कष्ट, पाप आदि दूर होते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें