अखंड द्वादशी की पूजा की विधि और महत्व
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अखंड द्वादशी व्रत की विधि
- अखंड द्वादशी व्रत के दिन सुबह सवेरे उठ जाएं और स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।
- षोडशोपचार विधि से लक्ष्मीनारायण भगवान की पूजा करें और व्रत कथा सुनें।
- इसके बाद भजन-कीर्तन करें।
- भगवान को भोग लगाने के बाद घर में सभी को प्रसाद वितरित करें।
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं और इसके बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करें।
- मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष द्वादशी व्रत में भगवान नारायण की पूजा श्वेत वस्त्र धारण कर की जानी चाहिए।
- जो व्यक्ति मार्गशीर्ष माह में भगवान की पूजा करते हैं उनसे देवता, गंधर्व और सूर्य आदि सब पूजित हो जाते हैं।
- इसलिए स्त्री व पुरुषों को यह व्रत जरूर करना चाहिए।
अखंड द्वादशी की पूजा की विधि और महत्व
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अखंड द्वादशी व्रत का महत्व
अखंड द्वादशी व्रत मार्गशीर्ष मास की द्वादशी तिथि को पड़ता है। यह परम पूजनीय कल्याणकारी होता है। इस तिथि पितृ तर्पण आदि क्रियाएं की जाती है तथा श्रद्धा व भक्ति पूर्ण ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है तथा विभिन्न प्रकार के दान हवन यज्ञादि क्रियाएं भी की जाती हैं। यह व्रत पवित्रता व शांत चित से श्रद्धा पूर्ण किया जाता है, यह व्रत मनोवांछित फलों को देने वाला और भक्तों के कार्य सिद्ध करने वाला होता है, इस व्रत को नित्यादि क्रियाओं से निवृत्त होकर श्रद्धा विश्वास पूर्ण करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि अगर इस व्रत को श्रद्धापूर्वक किया जाए तो व्यक्ति के पुत्र-पौत्र को धन-धान्य की प्राप्ति होती है।